चुप चाप कही जब सो जाती है ,मीठे सपनो में खो जाती है ।
दर्द बहुत जब बढ़ जाता है ,
आंखे हैं की रो जाती हैं ।
कड़वी बाते सभी पुरानी,
नये प्यार में धो जाती हैं ।
दो फूल खिले हो जिस आँगन ,
खुशियाँ वाही पे हो जाती हैं ।
चुप चाप कही जब सो जाती है ,1. भूमिका : स्वच्छंदतावाद की संकल्पना स्वच्छंदतावाद (Romanticism) अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में विकसित एक सशक्त साहित्यिक, कलात्मक और...
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