Wednesday, 8 April 2009

चुप चाप कही जब सो जाती है -------------------------

चुप चाप कही जब सो जाती है ,
मीठे सपनो में खो जाती है ।
दर्द बहुत जब बढ़ जाता है ,
आंखे हैं की रो जाती हैं ।
कड़वी बाते सभी पुरानी,
नये प्यार में धो जाती हैं ।
दो फूल खिले हो जिस आँगन ,
खुशियाँ वाही पे हो जाती हैं ।

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