चुप चाप कही जब सो जाती है ,मीठे सपनो में खो जाती है ।
दर्द बहुत जब बढ़ जाता है ,
आंखे हैं की रो जाती हैं ।
कड़वी बाते सभी पुरानी,
नये प्यार में धो जाती हैं ।
दो फूल खिले हो जिस आँगन ,
खुशियाँ वाही पे हो जाती हैं ।
चुप चाप कही जब सो जाती है ,संयुक्त राष्ट्र का “Correct the Map” प्रस्ताव मर्केटर से Equal Earth तक—अफ्रीका, मानचित्रण और वैश्विक प्रतिनिधित्व की नई राजनीति डॉ. मनीष कु...
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