चुप चाप कही जब सो जाती है ,मीठे सपनो में खो जाती है ।
दर्द बहुत जब बढ़ जाता है ,
आंखे हैं की रो जाती हैं ।
कड़वी बाते सभी पुरानी,
नये प्यार में धो जाती हैं ।
दो फूल खिले हो जिस आँगन ,
खुशियाँ वाही पे हो जाती हैं ।
चुप चाप कही जब सो जाती है ,जाने क्यों तुझे मैंने फिर पुकारा नहीं, मुश्किल ये कि तेरे बिन गुज़ारा नहीं। सफ़र लंबा है अभी बड़ी दूर जाना है अब किसे आवाज़ दूँ कोई सहारा न...
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