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सितंबर, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

देश से बड़कर धर्म नहीं है

देश से बड़कर धर्म नहीं है मानवता से बड़ा कोई  कर्म नहीं है प्यार मोहब्बत भाई चारा जुड़ कर रहना सीखो यारा धर्म के ऊपर युद्ध नहीं हो धर्म स्थल पे द्वन्द नहीं हो राम रहीम ईशा औ बुद्ध ने मोसेस नानक औ महावीर ने प्यार सिखाया नहीं सिखाई नफ़रत सौहाद्र शांति की डाली थी आदत चाहे जिस रूप में याद करे हम इश्वर अल्लाह या god कहे हम मिलकर रहना प्रेम बाँटना यही इबादत यही है जीना देश से बड़कर धर्म नहीं है मानवता से बड़ा कोई कर्म नहीं है प्यार मोहब्बत भाई चारा जुड़ कर रहना सीखो यारा

चलता है है बना हमारा काम चलता है

सब चलता है अभिप्राय है कलमाड़ी का राष्ट्र मंडल खेल हुए सब  चलता   है , स्टेडियम में काम है बाकी चलता है राहों  में गड्ढा है चलता है टपक रही है छत चलता है कुत्ते सोये बिस्तर पे चलता है डेंगू के मच्छर हैं फैलें चलता है १०० का काम किया हजार में चलता है खिला हुआ भ्रष्टाचार है चलता शर्मसार देश का नाम है चलता है चलता है व्यव्हार India   का चलता है चलता है है बना हमारा काम चलता है

Memorable Lines from Novel ‘Shantaram’ by Gregory David Roberts

Shantaram is, quite simply, the Arabian Nights of the new century. Anyone who loves to read has been looking for this book all their reaing life. A novel of high adventure, great storytelling and moral purpose, based on an extraordinary true story of eight years in the Bombay underworld.Following are some of the famous quotes / lines from the novel.... •‘He’d been trying to tell me that every human will has the power to transform its fate. I’d always thought that fate was something unchangeable: fixed for everyone of us at birth, and as constant as the circuit of the stars. But I suddenly realised that life is stranger and more beautiful than that. The truth is that, no matter what kind of game you find yourself in, no matter how good or bad the luck, you can change your life completely with a single thought or a single act of love.’ •‘Luck is what happens to you when fate gets tired of waiting’ •‘I hope that bear got away.’ •‘The only kingdom that makes any man a king is the kingdom o...

hindi blogging

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अबूझ पहेली मत बनना ,

अबूझ पहेली मत बनना , गूढ़ पहेली मत बनना चंद कदम चलकर साथ मेरे अनजान सहेली मत बनना लब अमृत सा पिया था हाथों में हाथ रखा था सीने से लग मुस्काए अभिमान सहेली मत बनना अनजान सहेली मत बनना चंद कदम चल साथ मेरे अबूझ पहेली मत बनना जीवन को महकाया था तूने सांसे गहरी करवाया था तूने राहों को हंसी से चहकाया था तूने मंजिल कटीली ना करना तुम आहों में अविश्वास ना भरना तुम साथ रहो ना रहो मगर प्यार नहीं ना कहना तुम अभिमान सहेली मत बनना अनजान सहेली मत बनना चंद कदम चल साथ मेरे अबूझ पहेली मत बनना अबूझ पहेली मत बनना , गूढ़ पहेली मत बनना चंद कदम चलकर साथ मेरे अनजान सहेली मत बनना

moments goes by ,

moments goes by , events fades by , feelings remains , care and affection what it means , judgements may not come true , believe is hard to believe , but love is always there to see . cherish those who stand by you , implore the goodness who are ignored by you , have faith in your own divinity , be good to every one by your civility. don`t take  pride in your achievement don`t go berserk in your embedment  have faith in humbleness time may bring joy and happiness , have growth and bliss . a life of content , full of good intent . of love and peace , of growth and ease.

एक लम्हा और मिला होता /

बतियाते  घंटो बीत गए  अब जाने की बेला आई थी  अभी तो हाथ लिया था हाथों में पर मोबाइल ने रिंग बजायी थी     एक लम्हा और मिला होता  तेरे लबों का अमृत पी लेता हाथों में हाथ लिए घूम रहे थे शाम से हम अभी तो अरमान मचले थे मेरे अभी सपने चमके थे मेरे रात हो आई देर हो रही एक लम्हा और दिया होता बाँहों में तुझको भर लेता सुबह सबेरे साथ चले थे शाम हो आई आखों ने ख्वाब धरे थे अभी अभी तो धड़कन थी उछली अभी अभी आखों आखों से प्यास कही थी देर हुई थी तुझे था जाना कैसे कहता ये दिल था दीवाना एक लम्हा और दिया होता मै अरमानो को जी लेता भर कर बाँहों में तुझको तेर लबों का अमृत पी लेता एक लम्हा और मिला होता /

उम्र बड़ी आशाएं घटी

उम्र बड़ी आशाएं घटी कुछ पल मुस्काए कुछ आंसू लाये कभी सजी जीवन  की सरगम कभी सताए दुःख औ क्रंदन एक जीवन में  जिए हम कितने जनम घटती सांसे औ बड़ता बंधन

सिमटते दायरों बिखरते संबंधों में भटकाव

सिमटते दायरों बिखरते संबंधों में भटकाव सहमी अपेक्षा उच्श्रीन्खल इच्छा में उलझाव   बदलते स्वरुप रिश्तों में समाहित अधिकार का बड़ता प्रकोप कुछ रिश्तों के नए विकार  का मान्यताएं टूटती स्व को पोषती नए विचार मै का प्रहार हम का घटता प्रचार नयी भागती दुनिया रीती नयी    पल के रिश्ते पल की प्रीती नयी

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कौतुहल है उत्सुकता है और बड़ी भावुकता है

कौतुहल है उत्सुकता है और बड़ी भावुकता है मिलेंगे किस अभिवादन से कितनी ही आतुरता है प्रीती दिखेगी प्यार दिखेगा या उलझा  संवाद दिखेगा प्यार मिले तिरस्कार मिले पर ना व्यवहारिक व्यवहार मिले कौतुहल है उत्सुकता है और बड़ी भावुकता है मिलेंगे किस अभिवादन से कितनी ही आतुरता है

काटे कितने ही वसंत अब जीना चाहता हूँ

काटे कितने ही वसंत अब जीना चाहता हूँ ऐ जिंदगी देखा किया तुझे अब छूना चाहता हूँ राह में कांटे सजे या हो फूल बिखरे पैरों तले मंजिल तक पहुँचाना नहीं ख्वाब  जीना चाहता हूँ काटे कितने ही वसंत अब जीना चाहता हूँ ऐ जिंदगी देखा किया तुझे अब छूना चाहता हूँ इशारे मौसम के रहे हों या हों वो महबूब तेरे ताका किया अब तक उन्हें अब छूना चाहता हूँ काटे कितने ही वसंत अब जीना चाहता हूँ    ऐ जिंदगी देखा किया तुझे अब छूना चाहता हूँ   अरमान सजोये या मोहब्बत को यादों में पिरोये अब तक गले लग जा अब तो तुझे अब  जीना चाहता हूँ काटे कितने ही वसंत अब जीना चाहता हूँ ऐ जिंदगी देखा किया तुझे अब छूना चाहता हूँ

दिल है बेक़रार किसी का

दिल है बेक़रार किसी का मन रहा पुकार किसी का कोई है मशगूल अपनी दिनचर्या में कोई कर रहा इंतजार किसी का /

Attempt of Interpreting the meaning of song ‘Meraa kuchh saamaan tumhaare paas padaa hai ’ from 1987 film Ijaazat.

Ijaazat(meaning "permission") is an acclaimed 1987 Indian Hindi film directed by Gulzar. Starring Rekha and Naseeruddin Shah in leading roles, the film followed the story of couple who are separated and who accidentally meet in a railway station waiting room and discover some truths about their lives without each other. The film belongs to the realistic, art cinema genre in India, known as parallel cinema, and won two National Film Awards in the music category. Ijaazat was inspired by the famous novel ‘Jatugriha’, by the noted Bengali writer Subhodh Ghosh, , was earlier made into a Bengali movie of the same name in 1964. Directed by Tapan Sinha, Jatugriha starred Uttam Kumar and Arundhati Devi. In a way, Ijaazat is a simple story about three people, two relationships and one night. But it derives its depth from its complex characterizations. Its strength lies in its screenplay and dialogues by Gulzar and its moody cinematography by Ashok Mehta. In the strong performances of i...

फिर-फिर के मै फिर जाता हूँ

फिर-फिर के मै फिर जाता हूँ      राह तेरी ही आता हूँ      ऐसा क्या है तुझमे रोता गाता तुझमे ही रम जाता हूँ फिर-फिर के मै फिर जाता हूँ     राह तेरी ही आता हूँ जतन किया कितने ही  नमन किये कितने ही  याद तेरी नहीं जाती  फिर तुझ तक ही आ जाता हूँ  फिर-फिर के मै फिर जाता हूँ      राह तेरी ही आता हूँ भाव विकल हो या हो तनहाई खुशियों का मौसम या हो रुसवाई  हर लमहा तुम तक ही जाता                                                 आसान हो रास्ता या कठिनाई  फिर-फिर के मै फिर जाता हूँ     राह तेरी ही आता हूँ ख्वाबों में संसार बसाया अच्छाई संग दौड़ लगाया ह...

शमा उदात्त है

शमा उदात्त है भावों में काम व्याप्त है तनहाई बिन तेरे तरसी हर बात है शमा उदात्त है भवरे चहके पराग हैं बहके नाचे  मोर अभिलाषाएं दहके पर्वत प्यासा प्यासी नीर हवा प्रेमातुर उमंगें अधीर गहरी सांसे कामी सपने चंचल मन मचला बदन तीव्र पिपाशा तन भी प्यासा रोक रहा मै क्या क्या जिज्ञासा शमा उदात्त है भावों में काम व्याप्त है तनहाई बिन तेरे तरसी हर बात है

शबाब तेरे हुश्न का और वो अदा

शबाब  तेरे हुश्न का और वो अदा शरारत कजरारी आखों में और चेहरे पे हया   भरपूर जवानी खिली हुई और सादगी की क़ज़ा लूटना ही था दिल को न था मै खुदा क्या कहा उन आखों ने क्या सुना मुस्कराहट की बातों में क्या कह गयी हवा तेरा बदन छू के जों आई थी क्या शमा महकी या मेरी हसरतें बेकाबू  थी तेरी खनकती आवाज में कुछ जादू था तेरी हर अदा कातिल औ तू ही मेरा साहिल था ख़ामोशी तेरी बयाँ कर रही थी किस्से कितने मै भी मशगूल था उसमे और बन रहे थे सपने

एक वक़्त हुआ हमको जिए

आखों  के आंसूं सूखें है   गम का अधियारा बाकी है एक वक़्त हुआ हमको जिए सांसों का थमना बाकी है दुनिया को मै हार भी जाता पर तुझको बाँहों में भरना बाकी है जीवन को मै त्याग  भी जाता पर अरमानो को जीना बाकी है आखों के आंसूं सूखें है गम का अधियारा बाकी है एक वक़्त हुआ हमको जिए सांसों का थमना बाकी है