तेरी यादों की चादर तान कर सोते हैं,
बेवफा तुझे मानकर रोते हैं.
मोहबत्त के अंजाम से वाकिफ थे हम,
मोल खतरे कुछ जानकर लेते हैं.
ये हिन्दुस्तान की रवायत है यारों,
हम दुश्मन को भी माफ़ कर देते हैं.
CHAPTER 3 The Language Question: Tajik, Uzbek, Mughat In-Group Speech, and the Secret Lexicon From the proposed monograph: The Lyuli (Mugh...