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अरुणोदित किरणे सहमी सी मुस्कान लिए ,

अरुणोदित किरणे सहमी सी मुस्कान लिए , मद्धिम हवा के झोंके इक अनोखी शान लिए , पत्तों  पे ओस की बुँदे एक सुनहरा  भान लिए , पक्षी के कलरव भौरों की गूंज महकी धरती संज्ञान लिए , एक  सहज सी शांति थी फैली इश्वर है कण कण में ज्ञान लिए , चीत्कारा जंगल गाडिओं की आवाजें भोपूं के सीत्कार लिए , सन्नाटा फैला नीरवता छाई स्तब्ध शमा आक्रांत लिए   , अरुणोदित किरणे सहमी सी मुस्कान लिए ,