Showing posts with label मेरी आँखें. Show all posts
Showing posts with label मेरी आँखें. Show all posts

Sunday, 24 November 2013

मेरी आँखें


मैंने कइयों से

यह सुना है कि

मेरी आँखें

बहुत बोलती हैं

सुबकुछ बोलती हैं

शायद इसीलिए

तुम हमेशा कहती थी

तुम्हारी आँखें

इजहार करना जानती हैं


तुम कुछ मत बोला करो

कृत्रिम बुद्धिमत्ता का भविष्य और भाषायी शिक्षा की बदलती दिशाएँ एक मानव-केंद्रित, बहुभाषी और उत्तरदायी दृष्टि

  भविष्य अध्ययन • भाषा शिक्षा • सार्वजनिक नीति कृत्रिम बुद्धिमत्ता का भविष्य और भाषायी शिक्षा की बदलती दिशाएँ एक मानव-केंद्रित, बहुभाषी और उ...

Popular Posts