यादों की महफ़िल है काम का है दौर , जीवन की प्रक्रिया का बदलना है ठौर ; नए लोंगों से मुलाकाते हैं कुछ पुरानी कुछ नयी बातें हैं कुछ लम्हे गुनगुनाते हैं कुछ पल मुस्कुराते हैं नयी सुबहे औ नया सबेरा है नया शहर नया बसेरा है /
हिन्दी साहित्य, भाषा-विज्ञान, समाज-विज्ञान, भारतीय संस्कृति और सिनेमा पर प्रामाणिक शोधपरक आलेख। संपादक: डॉ. मनीष कुमार मिश्रा।