सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

जुलाई, 2013 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

राष्ट्रीय सेमिनार दलित कविता: अस्मिता और प्रतिरोध की संस्कृति

राष्ट्रीय सेमिनार दलित कविता: अस्मिता और प्रतिरोध की संस्कृति   (23-24  जुलाई  2013 ) बीज-वक्तव्य ( Concept Note )        समकालीन कविता ने अपना एक विशिष्ट मुकाम हासिल किया है जिसे देख कर यह कहा जा सकता है कि भारतीय परिदृश्य पर दलित कविता ने अपनी उपस्थिति दर्ज करके सामाजिक संवेदना में बदलाव की प्रक्रिया तेज की है। दलित कविता के इस स्वरूप ने निश्चित ही भारतीय मानस की सोच को बदला है।                                   दलित कविता आनन्द या रसास्वादन की चीज नहीं है। बल्कि कविता के माध्यम से मानवीय पक्षों को उजागर करते हुए मनुष्यता के सरोकारों और मनुष्यता के पक्ष में खड़ा होना है। मनुष्य और प्रकृति, भाषा और संवेदना का गहरा रिश्ता है, जिसे दलित कविता ने अपने गहरे सरोकारों के साथ जोडा है।        दलित कविता ने अपनी एक विकास – यात्रा तय की है, जिसमें वैचारि...

National Seminar on Contemporary Modern Indian Languages (MILs’) Literature

Waves in the Silent Pool: National Seminar  on  Contemporary Modern Indian Languages (MILs’) Literature Organized by the Tagore Centre of the IIAS, Shimla  12 – 14 August, 2013 Concept Paper The charter of International PEN, the largest global body of writers, considers  literature of the world as one, though it is being written in many languages . In the context of India, however, this avowal has its obvious limitations. Firstly, because the literature being written in India essentially follows two parallel, independent modes of being: one of Indian English literature, having long achieved a worldwide currency; and another of Modern Indian Languages’ Literature (MILs’ Literature), with hardly any global readership. Secondly, the rich MILs’ Literature, being written in 23 languages, though constrained by similar factors impeding its wider appreciation, conceding a very few instances, hardly undertakes a sustained, cross-cultural dialogue across languages. A com...

तुम जब बोलती हो

                                                 तुम जब बोलती हो                 बहुत मीठा बोलती हो                 तुम्हारी जिद                 तुम्हारा गुस्सा                 तुम्हारी बेरूखी                 तुम्हारा प्यार                 सब एक से ही तो हैं                 ए...

वो मौसम

मैंने बातों बातों में फोन पे ही पूछा – इतने दिनों बाद आ रहा हूँ बोलो  - तुम्हारे लिए क्या लाऊँ जो हमारा हो हमारे लिए हो उसने   कहा - वो   मौसम   और हमारे साथ हो , हमेशा ।

ब्रूउट्स यू टू

थोडे आंसूँ , थोडे सपने और ढेर से सवालो के साथ् तेरी नीमकश निगाहो में जब् देखता हूँ    बहुत तड़पता हूँ इसपर तेरा हल्के से मुस्कुराना  ,  मुझे अंदर -ही अंदर सालता है  तेरा ख़ामोशी भरा इंतकाम , मेरे झूठे , बनावटी और मतलबी चरित्र के आवरण को मेरे अंदर ही खोल के रख देता है. मैं सचमुच कभी भी नहीं था  तुम्हारे उतने सच्चे प्यार के काबिल जितने के बारे में मैंने सिर्फ  फरिस्तों और परियों की कहानियों  में पढ़ा था . मैं तुम्हे सिवा धोखे के  नहीं दे पाया कुछ भी. और तुम देती रही  हर बार माफ़ी क्योंकि  तुम प्यार करना जानती थी. मैं बस सिमटा रहा अपने तक  और  तुम खुद को समेटती रही    मेरे लिए.  कभी कुछ भी नहीं माँगा तुमने , सिवाय मेरी हो जाने की  हसरत के . याद है वो दिन भी जब , तुमने मुझसे दूर जाते हुए नम आखों और मुस्कुराते लबों के साथ कागज़ का एक टुकड़ा चुपके से पकडाया   जिसमे लिखा था-" ब्रूउट्स यू  टू ? '' उसने जो...

शिकायत सब से है लेकिन

जो कहनी थी , वही मैं बात , यारों भूल जाता हूँ किसी क़ी झील सी आँखों में ,   जब भी डूब जाता हूँ   नहीं मैं आसमाँ का हूँ , कोई तारा मगर सुन लो किसी के प्यार के खातिर , मैं अक्सर टूट जाता हूँ शिकायत सब से है लेकिन , किसी से कह नहीं सकता बहुत गुस्सा जो आता है , तो खुद से रूठ जाता हूँ किसी क़ी राह का कांटा , कभी मैं बन नहीं सकता इसी कारण से मफिल में , अकेला छूट जाता हूँ मासूम से सपनों क़ी मिट्टी , का घड़ा हूँ मैं , नफरत क़ी बातों से , हमेशा फूट जाता हूँ .

काश तुम मिलती तो बताता

यूं ही तुम्हे सोचते हुए सोचता   हूँ क़ि चंद लकीरों से तेरा चेहरा बना दूं फिर उस चेहरे में , खूबसूरती   के सारे रंग भर दूं . तुझे इसतरह बनाते और सवारते हुए , शायद   खुद को बिखरने से रोक पाऊंगा पर जब भी कोशिश की , हर बार नाकाम रहा . कोई भी रंग , कोई भी तस्वीर , तेरे मुकाबले में टिक ही नहीं पाते . तुझसा , हू - ब - हू तुझ सा , तो बस तू है या   फिर तेरा अक्स है जो मेरी आँखों में बसा है . वो अक्स जिसमे प्यार के रंग हैं रिश्तों की रंगोली है कुछ जागते - बुझते सपने हैं दबी हुई सी कुछ बेचैनी है और इन सब के साथ , थोड़ी हवस भी है . इन आँखों में ही तू है तेरा ख़्वाब है तेरी उम्मीद है तेरा जिस्म है और हैं वो ख्वाहीशें , जो   तेरे बाद तेरी अमानत के तौर पे मेरे पास ही रह गयी हैं . मैं जानता हूँ की मेरी ख्वाहिशें , अब किसी और की जिन्दगी है . इस कारण अब इन ख्वाहिश...