सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

फ़रवरी, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

इस दौर ए निज़ाम में ।

तेरी आँखों से मेरा एक ख़ास रिश्ता है एक सपना है जो यहीं से हौंसला पाता है । शिकार हो जायेंगे हर हाल में सवाल सारे इस दौर ए निज़ाम में यह व्यवस्था पुख्ता है । तोड़ दिये गये हैं सब दाँत निरर्थक बताकर क्योंकि चाटने की परंपरा में काटना समस्या है । विश्व के इस सबसे बड़े सियासी लोकतंत्र में आवाम की कोई भी मजबूरी सिर्फ़ एक मौक़ा है । अपराधियों की श्रेणी में अब वो सब शामिल हैं जिनका कि खून व्यवस्था के ख़िलाफ़ खौलता है । जब कोई आख़री पायदान से चीख़ता-चिल्लाता है तो यक़ीनन वह उम्मीद की नई मशाल जलाता है । तुम्हें अब तक जितनी भी शिकायत रही है मुझसे वो तेरे इश्क़ का अंदाज़ है जो मुझे बहुत भाता है । ----------------- मनीष कुमार मिश्रा

जब तुम्हें लिखता हूँ ।

जब तुम्हें लिखता हूँ तो मन से लिखता हूँ तुम्हारे मन में बैठकर लिखता हूँ  । जब तुम्हें लिखता हूँ तो जतन से लिखता हूँ हर शब्दों को चखकर लिखता हूँ । जब तुम्हें लिखता हूँ तो बसंत लिखता हूँ होली के रंग में तुम्हें रंगकर लिखता हूँ । जब तुम्हें लिखता हूँ तो पुरवाई लिखता हूँ तुम्हारी आस में अपनी प्यास लिखता हूँ । जब तुम्हें लिखता हूँ तो दिल खोलकर  लिखता हूँ न जाने कितने सारे बंधन तोड़कर लिखता हूँ । जब तुम्हें लिखता हूँ तो खुशी लिखता हूँ आँख की नमी को तेरी कमी लिखता हूँ ।               -------मनीष कुमार मिश्रा ।

पद्मावत फ़िल्म

                 पद्मावत / पद्मावती फ़िल्म को लेकर शुरू से जब हंगामा बरप रहा था , तभी से उत्सुकता थी कि फ़िल्म देखनी चाहिये । आख़िर पता तो चले कि यह हंगामा बरपा क्यों ? वह भी फ़िल्म को बिना देखे । आरोप यह भी लगा कि यह सब “पब्लीसिटी स्टंट” है । अगर यह सब “पब्लीसिटी स्टंट” था भी तो इसके नैतिक पक्ष को लेकर बहस हो सकती है पर व्यावसायिक दृष्टि से तो यह स्टंट कामयाब रहा । राजपूती आन-बान-शान की दुहाई देने वाली आंदोलनकारी करणी सेना परिदृश्य से जिस तरह गायब हुई वह भी स्टंट वाली बातों को बल देती हैं । बहरहाल फ़िल्म प्रदर्शित हो चुकी है और अपनी कामयाबी की इबारत भी लिख चुकी है । फ़िल्म की अभी तक कि कमाई लगभग 500 करोड़ बतायी जा रही है , जो की अभी जारी है ।               संजय लीला भंसाली को इस शानदार फ़िल्म के लिये बधाई । अगर तथाकथित   “पब्लीसिटी स्टंट” में भंसाली जी शामिल भी रहे हों तो भी जितनी कटु आलोचना उन्होंने झेली , झपड़ियाए गये , माँ-बहन तक की...