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लूट लूट लूट ,

लूट लूट लूट , लूट रहा है हर कोई जो सकता है लूट ; लूट लूट लूट ; नेता लुटे है वादों से ; अफसर लुटे हैं इरादों से ; पत्रकार लूटता है शब्दों से ; कवी लूटता है अर्थों से ; अपने लुटे है जज्बों से ; रिश्तेदार लूटता है कर्मों से ; लूट लूट लूट ; लूट रहा है हर कोई जो सकता है लूट ; समाज लूटता है दिखावे से ; सम्बन्ध लूटता है भावों से ; दोस्तों ने यारी से लूटा ; चालाकों ने तीमारदारी से लूटा ; प्यार लूटता है अरमानो से ; परिवार लूटता है अहसानों से ; किस किस से कब तक है बचना ; ये कैसा है है जीवन अपना ; आ ख़ुद को लूटें इच्छावों से ; भगवन को लुटे कामनावों से ; लूट लूट लूट , लूट रहा है हर कोई जो सकता है लूट ;

आस्था की चुनौतियाँ हैं ;

आस्था की चुनौतियाँ हैं ; बिखरी संस्कृतियाँ हैं ; अवमाननावों की संकुचित राजनीती है ; तड़पती इंसानो की स्मृति है ; धर्मान्धता तर्क की आहुति बनी है ; सज्जनता मौन की वाहक बनी है ; क्यूँ न मरे हम तुम इस महफ़िल में ; चिल्लाहट ,तोड़ फोड़ ,खून खराबा , सच्चाई की मानक बनी हैं /