लूट लूट लूट , लूट रहा है हर कोई जो सकता है लूट ; लूट लूट लूट ; नेता लुटे है वादों से ; अफसर लुटे हैं इरादों से ; पत्रकार लूटता है शब्दों से ; कवी लूटता है अर्थों से ; अपने लुटे है जज्बों से ; रिश्तेदार लूटता है कर्मों से ; लूट लूट लूट ; लूट रहा है हर कोई जो सकता है लूट ; समाज लूटता है दिखावे से ; सम्बन्ध लूटता है भावों से ; दोस्तों ने यारी से लूटा ; चालाकों ने तीमारदारी से लूटा ; प्यार लूटता है अरमानो से ; परिवार लूटता है अहसानों से ; किस किस से कब तक है बचना ; ये कैसा है है जीवन अपना ; आ ख़ुद को लूटें इच्छावों से ; भगवन को लुटे कामनावों से ; लूट लूट लूट , लूट रहा है हर कोई जो सकता है लूट ;
हिन्दी साहित्य, भाषा-विज्ञान, समाज-विज्ञान, भारतीय संस्कृति और सिनेमा पर प्रामाणिक शोधपरक आलेख। संपादक: डॉ. मनीष कुमार मिश्रा।