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Honoured by Mr.Atul Zende. DEPUTY COMMISSIONER OF POLICE (ZONE-II)I

 

अमरकांत जन्मशती पर दो दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद

 अमरकांत जन्मशती के उपलक्ष्य में दिनांक 16-17 जनवरी 2026 को दो दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन ICSSR एवं महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के सहयोग से के एम अग्रवाल महाविद्यालय, कल्याण पश्चिम, महाराष्ट्र में किया जा रहा है।

राहत इंदौरी के 20 चुनिंदा शेर...

 राहत इंदौरी के 20 चुनिंदा शेर... 1.तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो 2.गुलाब, ख़्वाब, दवा, ज़हर, जाम क्या क्या है मैं आ गया हूं बता इंतज़ाम क्या क्या है 3.अपने हाकिम की फकीरी पे तरस आता है जो गरीबों से पसीने की कमाई मांगे 4.जुबां तो खोल, नजर तो मिला, जवाब तो दे मैं कितनी बार लुटा हूँ, हिसाब तो दे 5.फूलों की दुकानें खोलो, खुशबू का व्यापार करो इश्क़ खता है तो, ये खता एक बार नहीं, सौ बार करो 6.आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो 7.उस आदमी को बस इक धुन सवार रहती है बहुत हसीन है दुनिया इसे ख़राब करूं 8.बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियां उड़ जाएं 9.किसने दस्तक दी, दिल पे, ये कौन है आप तो अन्दर हैं, बाहर कौन है 10.ये हादसा तो किसी दिन गुजरने वाला था मैं बच भी जाता तो एक रोज मरने वाला था 11.मेरा नसीब, मेरे हाथ कट गए वरना मैं तेरी माँग में सिन्दूर भरने वाला था 12.अंदर का ज़हर चूम लिया धुल के आ गए कितने शरीफ़ लोग थे सब खुल के आ गए 13.कॉलेज के सब बच्चे चुप हैं क...

लास्लो क्रास्नाहोर्काई : 2025 के नोबेल पुरस्कार विजेता हंगेरियाई लेखक

 लास्लो क्रास्नाहोर्काई : 2025 के नोबेल पुरस्कार विजेता हंगेरियाई लेखक  बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में जब विश्व साहित्य ने उत्तर-आधुनिक युग में प्रवेश किया, तब मनुष्य की आत्मा में भय, असुरक्षा और अविश्वास की गहरी परछाइयाँ उतर आईं। सभ्यता का तीव्र तकनीकी विकास, राजनीतिक विफलताएँ और आध्यात्मिक शून्यता ने लेखक को एक ऐसे द्वंद्व में खड़ा कर दिया जहाँ अर्थ, आस्था और अस्तित्व—तीनों अस्थिर थे। इस विघटनशील युग में लास्लो क्रास्नाहोर्काई (László Krasznahorkai) का लेखन एक अद्भुत बौद्धिक और कलात्मक हस्तक्षेप के रूप में उभरता है। 2025 का नोबेल पुरस्कार जब उन्हें इस टिप्पणी के साथ दिया गया कि “उन्होंने अपनी सृजनात्मक और दूरदर्शी रचनाओं के माध्यम से, प्रलय के आतंक के बीच भी कला की शक्ति को पुनः प्रमाणित किया,” तो यह केवल एक लेखक का सम्मान नहीं था, बल्कि उस दृष्टि का उत्सव था जो अंधकार के बीच भी कला में मनुष्यत्व की संभावना खोजती है। क्रास्नाहोर्काई का साहित्य “प्रलय का सौन्दर्यशास्त्र” रचता है—जहाँ पतन और प्रतीक्षा के बीच एक सूक्ष्म करुणा जन्म लेती है। वे हमें सिखाते हैं कि जब इतिहास ठहर...

शोध शक्ति ( 25 सितम्बर से 1 अक्टूबर)

 

सुर्खियों में हिन्दी महोत्सव 2025

 

हिन्दी महोत्सव 2025

 

नवरोज़ पर मेरा आलेख International Institute of Central Asian Studies (IICAS), समरकंद द्वारा प्रकाशित।

Upcoming Book on Central Asia: Literary Cultural Scenario and Hindi

 

Two days online international Conference

 International Institute of Central Asian Studies (IICAS), Samarkand, Uzbekistan (by UNESCO Silk Road Programme ) Alfraganus University, Tashkent, Uzbekistan and Hindi Department, K.M.Agarwal Arts, Commerce and Science College, Kalyan (West) Maharashtra, India jointly organising Two Day Online International Conference *Central Asia: Literary, Cultural Scenario and Hindi* (Date : *Saturday-Sunday 20-21 September, 2025)* https://forms.gle/a1LppLVbiwF4JsbH8 For further Updates join the Groups: WhatsApp 👇 https://chat.whatsapp.com/H3ZxIUwtwctJToPlYUeAZX?mode=ac_t or Telegram Group 👇 https://t.me/+YfW3jFi9kUg0MmQ6

ताशकंद – एक शहर रहमतों का” : सांस्कृतिक संवाद और काव्य-दृष्टि का आलोचनात्मक अध्ययन

✦ शोध आलेख “ताशकंद – एक शहर रहमतों का” : सांस्कृतिक संवाद और काव्य-दृष्टि का आलोचनात्मक अध्ययन लेखक : डॉ. मनीष कुमार मिश्र समीक्षक : डॉ शमा 1. प्रस्तावना हिंदी साहित्य में विदेश-यात्रा और सांस्कृतिक संवाद पर आधारित साहित्यिक कृतियाँ सदैव विशेष आकर्षण का केंद्र रही हैं। कवि या लेखक जब किसी विदेशी भूमि में जाकर जीवन व्यतीत करता है तो वह केवल दृश्य या भूगोल का वर्णन नहीं करता, बल्कि उस भूमि की संस्कृति, समाज और प्रकृति के साथ अपने अंतरसंबंधों को भी व्यक्त करता है। इसी परंपरा में डॉ. मनीष कुमार मिश्र का काव्य-संग्रह  “ताशकंद – एक शहर रहमतों का”  एक महत्त्वपूर्ण योगदान है। ताशकंद, जो कि उज़्बेकिस्तान की राजधानी है, भारतीय मानस के लिए ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। लालबहादुर शास्त्री की आकस्मिक मृत्यु (1966) से लेकर राजकपूर की सिनेमाई लोकप्रियता तक, यह शहर भारत की स्मृति में स्थायी रूप से दर्ज है। कवि ने इस शहर में प्रवास और अध्यापन के दौरान प्राप्त अनुभवों को कविताओं के रूप में प्रस्तुत किया है। 2. शोध का उद्देश्य इस आलेख का उद्देश्य है – “ताशकंद – एक शहर रहमतों का”  संग...

दो दिवसीय ऑनलाइन अंतर्राष्ट्रीय परिसंवाद

 

अमरकांत : जन्म शताब्दी वर्ष

          अमरकांत : जन्म शताब्दी वर्ष डॉ. मनीष कुमार मिश्रा प्रभारी – हिन्दी विभाग के एम अग्रवाल कॉलेज , कल्याण पश्चिम महाराष्ट्र                   उत्तर प्रदेश के सबसे पूर्वी जिले बलिया में एक तहसील है - ‘रसड़ा’। इस रसड़ा तहसील के सुपरिचित गाँव ‘नगरा’ से सटा हुआ एक छोटा सा गाँव और है। यह गाँव है - ‘भगमलपुर’। देखने में यह गाँव नगरा गाँव का टोला लगता है।भगमलपुर गाँव तीन टोलों में बँटा है। उत्तर दिशा की तरफ का टोला यादवों (अहीरों) का टोला है तो दक्षिण में दलितों का टोला (चमरटोली)। इन दोनों टोलों के ठीक बीच में कायस्थों के तीन परिवार थे। ये तीनों घर एक ही कायस्थ पूर्वज से संबद्ध , कालांतर में तीन टुकड़ों में विभक्त होकर वहीं रह रहे थे।             इन्हीं कायस्थ परिवारों में से एक परिवार था सीताराम वर्मा व अनन्ती देवी का। इन्हीं के पुत्र के रूप में 1 जुलाई 1925 को अमरकांत का जन्म हुआ। अमरकांत का नाम श्रीराम रखा गया। इनक...