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राष्ट्रकवि दिनकर : उपाधि, साहित्यिक प्रतिष्ठा और उसकी निर्मिति

  राष्ट्रकवि दिनकर : उपाधि, साहित्यिक प्रतिष्ठा और उसकी निर्मिति रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हिंदी साहित्य के उन विरल कवियों में हैं जिनकी पहचान उनकी रचनाओं से आगे बढ़कर एक सार्वजनिक सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में निर्मित हुई। उन्हें सामान्यतः ‘राष्ट्रकवि’ कहा जाता है। विद्यालयों, विश्वविद्यालयों, सरकारी प्रकाशनों, साहित्यिक संस्थाओं और जनस्मृति में ‘राष्ट्रकवि दिनकर’ एक लगभग स्थिर संबोधन बन चुका है। किंतु जब इस संबोधन को आलोचनात्मक दृष्टि से देखा जाता है तो कई महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आते हैं—दिनकर को ‘राष्ट्रकवि’ की उपाधि आखिर किसने दी? क्या यह कोई औपचारिक उपाधि थी? यदि नहीं, तो इसका प्रचलन कैसे हुआ? और सबसे महत्वपूर्ण, जब मैथिलीशरण गुप्त, माखनलाल चतुर्वेदी, सुभद्रा कुमारी चौहान, बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’, सोहनलाल द्विवेदी आदि अनेक कवियों के काव्य में राष्ट्रीय चेतना अत्यंत प्रबल थी, तो ‘राष्ट्रकवि’ संबोधन दिनकर के साथ ही इतनी स्थायी शक्ति से क्यों जुड़ गया? इन प्रश्नों का उत्तर केवल दिनकर की राष्ट्रवादी कविताओं में खोजने से नहीं मिलेगा। इसके लिए साहित्य, राजनीति, सार्वजनिक जीवन, आलोचना, लोकप्...
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राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के खंडकाव्य

 

Gandhi Mahotsav 2026

  📢 Gandhi Mahotsav 2026 – Online Lecture Dear Faculty Members and Students, K. M. Agrawal College of Arts, Commerce and Science, Kalyan, warmly invites you to join an Online Lecture on “Gandhian Philosophy” as part of Gandhi Mahotsav 2026. 🎙️ Resource Person: Prof. Sherdor Pulatov Professor, Department of Foreign Languages and Humanities Cyber University, Tashkent, Uzbekistan 📅 Date: 28 September 2026 (Monday) ⏰ Lecture Time: 10:00 AM – 11:00 AM 💻 Mode: Online – Zoom 🕤 Zoom meeting opens: 9:30 AM 👉 Join Zoom Meeting: Join the Zoom Meeting Meeting ID: 861 2822 2178 Passcode: 289751 All faculty members and students are requested to join the session and take advantage of this academic interaction with Prof. Sherdor Pulatov. Join • Listen • Reflect • Learn Join Zoom Meeting https://us06web.zoom.us/j/86128222178?pwd=qOcFYMj3oolLdNEdnqV3E0KflAsAxJ.1 Join and take notes https://us06web.zoom.us/j/86128222178?pwd=qOcFYMj3oolLdNEdnqV3E0KflAsAxJ.1&mynotes=on Meeting chat link https...

केंद्रीय हिंदी निदेशालय की ‘भाषा’ पत्रिका के विशेषांक हेतु आलेख आमंत्रित

केंद्रीय हिंदी निदेशालय की ‘भाषा’ पत्रिका के विशेषांक हेतु आलेख आमंत्रित केंद्रीय हिंदी निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट पर 18 सितंबर 2026 को द्वैमासिक पत्रिका ‘भाषा’ के आगामी विशेषांक हेतु आलेख आमंत्रण की सूचना प्रकाशित की गई है। हिंदी भाषा, साहित्य और संबंधित अकादमिक क्षेत्रों में कार्यरत अध्येताओं, शोधार्थियों और लेखकों के लिए यह सूचना उपयोगी हो सकती है। केंद्रीय हिंदी निदेशालय, उच्चतर शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार हिंदी के विकास, शब्दकोश एवं विश्वकोश निर्माण, देवनागरी और हिंदी वर्तनी के मानकीकरण तथा उच्च शिक्षा संस्थानों में हिंदी भाषा-साहित्य से जुड़े कार्यों के समन्वय सहित अनेक गतिविधियाँ संचालित करता है। इच्छुक लेखक आवेदन अथवा आलेख भेजने से पहले केंद्रीय हिंदी निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध नवीनतम सूचना में विशेषांक का विषय, आलेख की अपेक्षित प्रकृति, शब्द-सीमा, प्रारूप, अंतिम तिथि और प्रेषण संबंधी निर्देश अवश्य जाँचें। केवल आधिकारिक सूचना को अंतिम मानें। आधिकारिक स्रोत: केंद्रीय हिंदी निदेशालय ONLINE HINDI JOURNAL www.onlinehindijournal.blogspot.com

Conference News

 

मनमोहन’ और ‘मनमोहक’ दोनों में अंतर

  मनमोहन’ और ‘मनमोहक’ दोनों का संबंध मन को आकर्षित करने से है, लेकिन इनके प्रयोग में थोड़ा अंतर है। मनमोहन = जो मन को मोह ले । यह प्रायः व्यक्ति, ईश्वर या किसी सजीव रूप के लिए विशेषण/नाम के रूप में आता है। जैसे— श्रीकृष्ण का मनमोहन रूप , मनमोहन मुस्कान । ‘मनमोहन’ स्वयं एक प्रसिद्ध व्यक्तिनाम भी है। मनमोहक = जो मन को आकर्षित करे, बहुत सुंदर या आनंददायक लगे । इसका प्रयोग अधिक व्यापक रूप से दृश्य, वातावरण, वस्तु, प्रस्तुति, आवाज़, सौंदर्य आदि के लिए होता है। जैसे— मनमोहक दृश्य , मनमोहक संगीत , मनमोहक वातावरण । इसलिए यदि आप लिख रहे हैं— “पहाड़ों का ___ दृश्य” , तो “मनमोहक दृश्य” अधिक स्वाभाविक और मानक प्रयोग है। संक्षेप में: मनमोहन = मन को मोह लेने वाला , जबकि मनमोहक = आकर्षक, रमणीय, चित्ताकर्षक ।

Press note for conference

   प्रेस विज्ञप्ति भारतीय सिनेमा और मध्य एशिया के सांस्कृतिक संबंधों पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय परिसंवाद सफलतापूर्वक सम्पन्न कल्याण, 19 सितंबर 2026। के. एम. अग्रवाल कला, वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय, कल्याण (पश्चिम), महाराष्ट्र के हिन्दी विभाग द्वारा सहयोगी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय अंतर्विषयी ऑनलाइन परिसंवाद ‘मध्य एशिया में भारतीय सिनेमा: इतिहास, संस्कृति और सांस्कृतिक कूटनीति’ आज सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। 18 और 19 सितंबर 2026 को हिन्दी तथा अंग्रेज़ी माध्यम में आयोजित इस अकादमिक कार्यक्रम ने भारतीय सिनेमा और मध्य एशियाई समाजों के बीच विकसित ऐतिहासिक, भावनात्मक और सांस्कृतिक संबंधों को गंभीर शोध-विमर्श का विषय बनाया। भारत, उज़्बेकिस्तान, श्रीलंका, अज़रबैजान तथा अन्य क्षेत्रों से जुड़े शिक्षकों, शोधकर्ताओं, अनुवादकों और संस्कृति-अध्येताओं ने इसमें भाग लिया। परिसंवाद का संयुक्त आयोजन महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी, के. एम. अग्रवाल महाविद्यालय, कल्याण, इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट फॉर सेंट्रल एशियन स्टडीज़ (IICAS), समरकंद तथा ता...