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विक्रम साराभाई और मृणालिनी : विज्ञान और नृत्य के बीच प्रेम की कहानी

  विक्रम साराभाई और मृणालिनी : विज्ञान और नृत्य के बीच प्रेम की कहानी भारतीय इतिहास में कुछ प्रेमकथाएँ ऐसी हैं जिन्हें केवल प्रेमी-प्रेमिका की कहानी कह देना उनके अर्थ को छोटा कर देना है। वे दो व्यक्तित्वों, दो संसारों और दो जीवन-दृष्टियों के मिलन की कहानियाँ होती हैं। विक्रम साराभाई और मृणालिनी साराभाई की कहानी भी ऐसी ही कहानी है। एक ओर वह युवक था जिसकी आँखों में अंतरिक्ष और ब्रह्मांड के रहस्य थे; दूसरी ओर वह युवती थी जिसके भीतर भारतीय नृत्य, संगीत और रंगमंच की लय धड़कती थी। एक का संसार प्रयोगशाला था, दूसरे का मंच। एक तारों को वैज्ञानिक उपकरणों से समझना चाहता था, दूसरी अपने शरीर की गति से भावों और कथाओं को व्यक्त करती थी। फिर भी दोनों के बीच एक ऐसा संबंध बना जिसने भारतीय सांस्कृतिक और वैज्ञानिक इतिहास में अपनी अलग जगह बनाई। पहली मुलाकात : दो अलग संसारों का सामना विक्रम साराभाई का जन्म 12 अगस्त 1919 को अहमदाबाद के एक प्रतिष्ठित औद्योगिक परिवार में हुआ था। परिवार में शिक्षा, कला और सामाजिक सरोकारों का वातावरण था। आगे चलकर उन्होंने भौतिकी और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में ऐसा योगदान...
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रवींद्रनाथ ठाकुर और अन्नपूर्णा तुर्खड : ‘नलिनी’ की अधूरी प्रेमकथा

  रवींद्रनाथ ठाकुर और अन्नपूर्णा तुर्खड : ‘नलिनी’ की अधूरी प्रेमकथा रवींद्रनाथ ठाकुर का नाम लेते ही कविता, गीत, प्रकृति, प्रेम और मानवीय संवेदना की एक विराट दुनिया हमारे सामने खुल जाती है। लेकिन स्वयं रवींद्रनाथ के जीवन में भी कुछ ऐसे संबंध आए, जिन्होंने उनके भीतर के कवि को गहराई से छुआ। अन्नपूर्णा तुर्खड के साथ उनका संबंध ऐसा ही एक प्रसंग है—एक छोटी-सी मुलाकात, कुछ सप्ताहों की आत्मीयता और फिर जीवन भर बनी रहने वाली स्मृति। यह कहानी इसलिए भी विशेष है कि इसमें रवींद्रनाथ केवल कवि नहीं, बल्कि सत्रह वर्ष के एक संकोची युवक के रूप में दिखाई देते हैं, जो पहली बार भारत से बाहर जाने की तैयारी कर रहा है। मुंबई में एक मुलाकात सन् 1878 में रवींद्रनाथ ठाकुर की उम्र केवल 17 वर्ष थी। उनके बड़े भाई सत्येंद्रनाथ ठाकुर चाहते थे कि इंग्लैंड जाने से पहले रवींद्रनाथ अंग्रेज़ी भाषा और पश्चिमी सामाजिक व्यवहार से परिचित हो जाएँ। इसी उद्देश्य से उन्हें कुछ समय के लिए मुंबई में प्रसिद्ध समाज-सुधारक और चिकित्सक डॉ. आत्माराम पांडुरंग तुर्खड के परिवार के यहाँ भेजा गया। आत्माराम पांडुरंग केवल चिकित्सक नहीं थे। ...

अमृता प्रीतम और साहिर लुधियानवी : एक अधूरी मोहब्बत की कहानी

  अमृता प्रीतम और साहिर लुधियानवी : एक अधूरी मोहब्बत की कहानी अमृता प्रीतम और साहिर लुधियानवी की प्रेमकथा भारतीय साहित्य और फिल्म-संगीत की उन कहानियों में है, जिसमें मुलाकात कम, मौन अधिक और प्रेम शब्दों से कहीं आगे था। यह प्रेम पारंपरिक अर्थों में विवाह तक नहीं पहुँचा, लेकिन दोनों की रचनात्मक दुनिया पर उसका गहरा प्रभाव पड़ा। पहली मुलाकात अमृता प्रीतम और साहिर लुधियानवी की मुलाकात साहित्यिक माहौल में हुई थी। उस समय अमृता पहले से विवाहित थीं और साहिर अपने संघर्षपूर्ण साहित्यिक जीवन में आगे बढ़ रहे थे। दोनों के बीच धीरे-धीरे एक ऐसा भावनात्मक संबंध बना, जिसे अमृता ने बाद में अपनी आत्मकथा ‘रसीदी टिकट’ में बहुत आत्मीयता से याद किया। अमृता को साहिर का व्यक्तित्व और उनकी शायरी बेहद आकर्षित करती थी। साहिर भी अमृता के व्यक्तित्व और लेखन से प्रभावित थे। लेकिन यह रिश्ता सामान्य प्रेम-संबंध की तरह नहीं था। दोनों के बीच अक्सर मौन ही संवाद का माध्यम बन जाता था। वह कमरा, वह सिगरेट और वह मौन अमृता की स्मृतियों में साहिर से जुड़ा एक बेहद प्रसिद्ध प्रसंग आता है। साहिर जब अमृता के पास बैठते, तो बहु...

सुभाष चंद्र बोस और एमिली शेंकल की प्रेम कहानी

5 सुभाष चंद्र बोस और एमिली शेंकल की प्रेम कहानी सुभाष चंद्र बोस और एमिली शेंकल की प्रेमकथा भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक अनोखी और अपेक्षाकृत कम चर्चित कहानी है। यह संबंध लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन से लगभग छिपा रहा और इसके बारे में उपलब्ध जानकारी का बड़ा हिस्सा बाद के संस्मरणों और पारिवारिक स्रोतों से मिलता है। पहली मुलाकात 1930 के दशक की शुरुआत में सुभाष चंद्र बोस यूरोप में थे। उस समय वे स्वास्थ्य-संबंधी कारणों और राजनीतिक गतिविधियों के सिलसिले में यूरोप में रह रहे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात ऑस्ट्रिया की युवती एमिली शेंकल से हुई। एमिली ने बोस के साथ उनके लेखन और पत्र-व्यवहार से जुड़े काम में सहायता की। बोस उस समय अपनी पुस्तक The Indian Struggle पर काम कर रहे थे। धीरे-धीरे पेशेवर परिचय व्यक्तिगत निकटता में बदल गया। प्रेम और दूरी बोस का जीवन सामान्य पारिवारिक जीवन से बिल्कुल अलग था। उनका अधिकांश समय भारत की स्वतंत्रता के संघर्ष, राजनीतिक यात्राओं और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध गतिविधियों में बीत रहा था। दूसरी ओर, एमिली यूरोप में थीं। इसलिए उनका संबंध लगातार दूरी, राजनीतिक परि...