गांधी दर्शन गांधी दर्शन महात्मा गांधी के जीवन, विचार और कर्म से विकसित वह चिंतन है, जिसमें सत्य, अहिंसा, प्रेम, आत्मसंयम, स्वराज, साधन की शुद्धता, सर्वोदय और मानव-कल्याण को केंद्रीय स्थान प्राप्त है। गांधी के लिए दर्शन केवल बौद्धिक चिंतन नहीं था, बल्कि जीवन जीने की पद्धति था। 1. सत्य गांधी दर्शन का मूल आधार सत्य है। गांधी के लिए सत्य केवल झूठ न बोलने का नैतिक नियम नहीं था, बल्कि जीवन का सर्वोच्च मूल्य था। उन्होंने अपने जीवन को ही सत्य के प्रयोगों की प्रयोगशाला बनाया। उनका प्रसिद्ध कथन था— “सत्य ही ईश्वर है।” बाद के चिंतन में गांधी ने पारंपरिक सूत्र “ईश्वर सत्य है” की अपेक्षा “सत्य ही ईश्वर है” को अधिक महत्त्व दिया। 2. अहिंसा गांधी की अहिंसा निष्क्रियता या कायरता नहीं है। यह अन्याय का सामना करने की सक्रिय नैतिक शक्ति है। गांधी मानते थे कि हिंसा से प्राप्त विजय स्थायी नहीं हो सकती। अहिंसा का अर्थ विरोधी से घृणा करना नहीं, बल्कि उसके अन्याय का विरोध करते हुए उसके प्रति मनुष्य के रूप में सम्मान बनाए रखना है। 3. सत्याग्रह सत्याग्रह गांधी दर्शन की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक-नैतिक अवधार...
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हिन्दी साहित्य, भाषा-विज्ञान, समाज-विज्ञान, भारतीय संस्कृति और सिनेमा पर प्रामाणिक शोधपरक आलेख। संपादक: डॉ. मनीष कुमार मिश्रा।