भारतीय वैदिक और पौराणिक परंपरा में अनेक महत्वपूर्ण स्त्री पात्र हैं। इन्हें देवी, ऋषिका, मातृ-पात्र, राजपरिवार की स्त्रियाँ और कथानायिकाएँ आदि रूपों में देखा जा सकता है। वेदों की प्रमुख स्त्री पात्र / ऋषिकाएँ स्त्री पात्र संक्षिप्त परिचय अदिति देवताओं की माता; अनंतता और व्यापकता की प्रतीक उषा प्रातःकाल की देवी; सौंदर्य, नवजीवन और आशा का प्रतीक सरस्वती ज्ञान, वाणी और विद्या से संबद्ध देवी वाक् (वाग्देवी) वाणी और सृजनात्मक शक्ति का प्रतीक; ऋग्वेद में प्रसिद्ध वाक् सूक्त पृथ्वी धरती की देवी और जीवन-धारण करने वाली शक्ति रात्रि रात्रि की देवी; ऋग्वेद में रात्रि सूक्त प्रसिद्ध है लोपामुद्रा ऋषि अगस्त्य की पत्नी और ऋग्वैदिक ऋषिका घोषा ऋग्वेद की प्रसिद्ध ऋषिका अपाला ऋग्वेद में उल्लिखित ऋषिका विश्ववारा ऋग्वेद की ऋषिका रोमशा वैदिक ऋषिका शची/इन्द्राणी इंद्र की पत्नी; वैदिक साहित्य में उल्लेखित सूर्या विवाह सूक्त से संबद्ध स्त्री पात्र; वैदिक विवाह परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक उपनिषदों और वैदिक परंपरा की प्रमुख स्त्रियाँ 1. गार्गी वाचक्नवी — राजा जनक की सभा में याज्ञवल्क्य से दार्शनिक प्रश्न करने...
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हिन्दी साहित्य, भाषा-विज्ञान, समाज-विज्ञान, भारतीय संस्कृति और सिनेमा पर प्रामाणिक शोधपरक आलेख। संपादक: डॉ. मनीष कुमार मिश्रा।