खुशकिस्मत कितना ये मेजबान है ।
तुम्हारे घर उर्दू,मेरे घर में हिन्दी,
फ़िर भी मोहब्बत का अरमान है ।
मुहमांगी कीमत चुकाने के बाद,
लड़की का बाप करता कन्यादान है ।
हर ग़लत बात पे आवाज उठाओ ,
कदम हर कदम तुम्हारा ही नुक्सान है । ।
संयुक्त राष्ट्र का “Correct the Map” प्रस्ताव मर्केटर से Equal Earth तक—अफ्रीका, मानचित्रण और वैश्विक प्रतिनिधित्व की नई राजनीति डॉ. मनीष कु...
आपके, मेरे ब्लॉग से जुड़ने पर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हुई. में आपका आभारी हूँ. मुझे आशा है की आप जब भी मेरे ब्लॉग पर आयेंगे, प्रसन्न होने का कोई न कोई कारण ज़रूर पाएंगे.
ReplyDeleteतुम्हारे घर उर्दू,मेरे घर में हिन्दी,
ReplyDeleteफ़िर भी मोहब्बत का अरमान है ।
अच्छी पंक्तिया... और बढ़िया रचना..... बहुत दिनों बाद आपको पढ़ रहा हूँ, इतनी अच्छी रचना पढ़ी मजा आ गया...
आपको और आपके पुरे परिवार को वैशाखी की हार्दिक शुभ कामना !
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