अन्ना की ललकार है सरकार ये गद्दार है इनके उपर नहीं भरोसा , क्योंकि नेता ये मक्कार हैं . हिन्दुस्तानी जनता ने , कर दी अब यलगार है . सत्ता वालों शर्म करो, हो रहा तेरा धिक्कार है. अन्ना को झुकाने की, हर चाल तेरी बेकार है.
हिन्दी साहित्य, भाषा-विज्ञान, समाज-विज्ञान, भारतीय संस्कृति और सिनेमा पर प्रामाणिक शोधपरक आलेख। संपादक: डॉ. मनीष कुमार मिश्रा।