Showing posts with label इल्ज़ाम रखते हो. Show all posts
Showing posts with label इल्ज़ाम रखते हो. Show all posts

Sunday, 14 April 2013

मेरे हिस्से में सिर्फ़, इल्ज़ाम रखते हो



मेरे हिस्से में सिर्फ़, इल्ज़ाम रखते हो 

किस्सा-ए-मोहबत्त यूं तमाम करते हो  


                                 मनीष "मुंतज़िर ''



भारतीय ज्ञान परंपरा में गाली का स्वरूप और महत्व भाषा, लोक-संस्कृति, साहित्य और सामाजिक मनोविज्ञान के संदर्भ में एक अध्ययन डॉ. मनीष कुमार सी. मिश्रा

  भारतीय ज्ञान परंपरा में गाली का स्वरूप और महत्व भाषा, लोक-संस्कृति, साहित्य और सामाजिक मनोविज्ञान के संदर्भ में एक अध्ययन डॉ. मनीष कुमार स...

Popular Posts