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आज तीस वसंत के बाद

आज 9 फरवरी 2012 को , जीवन के  तीस वसंत के बाद जब पीछे मुड़ कर देखता हूँ तो कई मुस्कुराते चेहरों को पाता हूँ । लगभग हर आँख में , अपने  लिए प्यार पाता हूँ । अपने लिए इंतजार पाता हूँ । कुछ अधूरे सपनों की कसक पाता हूँ । संतोष और अपार सुख पाता हूँ । फिर जब आगे देखता हूँ तो कईयों की उम्मीद देखता हूँ । कई-कई अरमान देखता हूँ । वादों का भरी बोझ देखता हूँ । किसी को खुश, किसी को नाराज देखता हूँ । फिर जहां खड़ा हूँ वहाँ से आज तीस वसंत बाद, जब खुद को आँकता हूँ तो , उस परम सत्ता की कृपा के आगे नत मस्तक होते हुए इस जीवन के लिए धन्यवाद देता हूँ । और प्रणाम करता उन सभी को जिनहोने , मुझे अपने प्रेम और घृणा विश्वास और अविश्वास आशीष और श्राप इत्यादि के साथ अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया और आज जीवन के इस पड़ाव पर , मेरे लिए अपार सुख और संतोष के नियामक बने । आभारी हूँ मैं सभी का  । आभारी हूँ उसका भी जो , मेरे अंदर मेरी बनकर रहती है । मेरे अंदर शक्ति का संचार करती है । वो जिसकी गर्मी प्राणवायु सी लगती ह...