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आखों में तेरे खोया हूँ अब तक,

आखों में तेरे खोया हूँ अब तक, कितनी ही रातें न सोया हूँ  अब तक , जागे हुए सपनों की बातें करूँ क्या , न पूरी हुई मुलाकाते वो कहूँ क्या , बाँहों का घेरा था कितना अकेला था खिलता अँधेरा था तन्हायी  ने  घेरा था यादें महकी थी आहें बहकी थी गमनीन सीरत थी तू बड़ी खुबसूरत थी फिजा गुनगुनायी थी चाहत सुगबुगाई थी तू मन मंजर पे छाई थी तू न मेरी हुई न परायी थी   किस्से अधूरे हैं वाकये न पूरे हैं जीवन के लम्हे है हंसते और सहमे है

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HAPPY DEEPAWALI

तुम्हारी यादों के साथ,  तुम्हारी ही बातों के पास ,  जलता-सुलगता बहुत कुछ है .  शायद मन में, मन रही दीपावली है.           तेरी आँखों में जलते सपनो ,  और मेरे दिल की उलझनों के बीच  बिखरता, टूटता,कसमसाता आज भी कुछ है . शायद मन में, मन रही दीपावली है .

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