प्रेम -------------- एक ऐसा शब्द है जो, जीवन को मखमली स्पर्श देता है. जिन्दगी की धुप में, सुकून के पल देता है. इंसान को प्रेम ही, इंसानियत की ताशीर देता है. यह प्रेम ही है जो, हमे गीता और क़ुरान देता है. प्रेम ही हमे, संवेदनाओं का वसंत देता है. मेरे भाई , यह प्रेम ही है जो, सिर्फ देता और देता है .
हिन्दी साहित्य, भाषा-विज्ञान, समाज-विज्ञान, भारतीय संस्कृति और सिनेमा पर प्रामाणिक शोधपरक आलेख। संपादक: डॉ. मनीष कुमार मिश्रा।