तेरा शहर बहुत याद आता है
दिल तेरी ही यादों में चैन पाता है .
वो शमा जिससे रोशन थी जिन्दगी,
परवाना उसी में जल जाना चाहता है.
अपनी आदतों से परेशान हूँ यारों,
दिल ता उम्र आवारगी चाहता है .
राष्ट्रीय जागरण और स्वामी विवेकानंद: भारतीय आत्मबोध, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्र-निर्माण का विमर्श डॉ. मनीष कुमार सी. मिश्रा एसोसिएट ...