तेरा शहर बहुत याद आता है
दिल तेरी ही यादों में चैन पाता है .
वो शमा जिससे रोशन थी जिन्दगी,
परवाना उसी में जल जाना चाहता है.
अपनी आदतों से परेशान हूँ यारों,
दिल ता उम्र आवारगी चाहता है .
CHAPTER 3 The Language Question: Tajik, Uzbek, Mughat In-Group Speech, and the Secret Lexicon From the proposed monograph: The Lyuli (Mugh...