========================= तेरी खुशियों की सीढी दिल के टुकडों से सजाई थी , तेरी सफलता की दुआ अपनी असफलता से चुरायी थी ; तुझे और क्या दूँ जो तेरा मन नही भरता , तेरी मुस्कानों की राह अपने आंसूं से बनाई थी / ============================== ============================== मेरी असफलता को और असफल कैसे करोगे तुम , मेरी तन्हाई को और तनहा कैसे करोगे तुम ; तेरी खुशियाँ जुड़ीं हैं मेरी बरबादियों से , मेरी जुदाई को और जुदा कैसे करोगे तुम / ========================
हिन्दी साहित्य, भाषा-विज्ञान, समाज-विज्ञान, भारतीय संस्कृति और सिनेमा पर प्रामाणिक शोधपरक आलेख। संपादक: डॉ. मनीष कुमार मिश्रा।