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ताशकंद का राज कपूर रेस्टोरेंट

 ताशकंद में भारतीय व्यंजन परोसने वाले रेस्टोरेंट्स में से "राज कपूर" एक है । शहर के बीचों बीच स्थित यह रेस्टोरेंट एक बड़े होटल द ग्रैंड प्लाजा का एक हिस्सा है जो पहली मंजिल पर स्थित है। यहां शाकाहारी एवम मांसाहारी दोनों भारतीय व्यंजन मिलते हैं। खास बात यह है कि इस रेस्टोरेंट के मालिक भारतीय नहीं बल्कि जकार्ता से हैं । यहां के अधिकांश कर्मचारी उज़्बेकी हैं जो अंग्रेजी और  उज़्बेकी भाषा बोलते हैं। लेकिन किचन में व्यंजन बनानेवाले शेफ भारत से हैं अतः स्वाद में वो भारतीयता की महक महसूस होती है। रोटी दाल, दाल चावल जैसे नियमित भारतीय भोज्य पदार्थ आप को उज़्बेकिस्तान के सामान्य होटलों में नहीं मिल पाएगा । इसके लिए आप को राज कपूर, द होस्ट, शालीमार और कारवां जैसे रेस्टोरेंट्स में ही आना होगा । हिंदी फिल्मों के महानायक राज कपूर के नाम पर बने इस रेस्टोरेंट में आप राजकपूर समेत कई अन्य भारतीय सिने अभिनेता एवम अभिनेत्रियों के फिल्मी पोस्टर और चित्र देख सकते हैं जिन्हें बड़े करीने से यहां की दीवारों पर सजाया गया है। जो कि उनकी वैश्विक लोकप्रियता का प्रतीक है।

वो मेरी मातृभाषा है।

 वो मेरी मातृभाषा है । जिसके आंचल ने दुलराया  भावों से भर दिए हैं प्राण जिसकी रज को चंदन जाना और जाना जिसके तन को अपना प्राण वो मेरी मातृभाषा है। जीवन के ताने बाने को बुननेवाली वो भाषा मुझमें अक्सर शामिल वो बिलकुल मुझ सी  वो मेरी मातृभाषा है। जिसकी कोह में मेरे सारे राग विराग जो सुलझाती सारी उलझन को करती रहती सदा दुलार वो मेरी मातृभाषा है। श्वास श्वास जिसकी अभिलाषा जो जीवन शैशव सी है प्यारी जो पावन उतनी जितने की चारों धाम वो मेरी मातृभाषा है। डॉ मनीष कुमार मिश्रा विजिटिंग प्रोफेसर (ICCR Hindi Chair) ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज ताशकंद, उज़्बेकिस्तान।

18. मजबूरियां बेड़ियां बन पांव से लिपट जाती हैं

 मजबूरियां बेड़ियां बन पांव से लिपट जाती हैं परदेश में मेरी दुनियां कितनी सिमट जाती है। वहां दिन रात कितना कुछ कहते सुनते थे हम  यहां पराई बोली के आगे ज़ुबान अटक जाती है। यहां अकेले अब वो इस कदर याद आती हैं कि उन्हें सोचते हुए पूरी रात यूं ही निपट जाती है। अब इन सर्द हवाओं में अकेले यहां दुबकते हुए  उसके हांथ की चाय मेरे हाथों से छटक जाती है। गुल गुलशन शहद चांदनी वैसे तो सब है लेकिन वो ख़्वाब में आकर मुझे प्यार से डपट जाती है। डॉ मनीष कुमार मिश्रा विजिटिंग प्रोफेसर ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज उज़्बेकिस्तान