Showing posts with label रात सोती है और मैं जागता हूं डॉ मनीष कुमार मिश्रा की गज़लें. Show all posts
Showing posts with label रात सोती है और मैं जागता हूं डॉ मनीष कुमार मिश्रा की गज़लें. Show all posts

Tuesday, 30 May 2023

रात सोती है और मैं जागता हूं

 














रात सोती है और मैं जागता हूं

कितने अजीब शौख पालता हूं।


बस इश्क की लाज के खातिर 

तुम्हारे झूठ को सच मानता हूं।


कह दूंगा तो शर्मिंदा होगे तुम 

मैं इसलिए ही बात टालता हूं।


तुमसे हाँथ मिलाया हूं लेकिन

तुम्हारे हर फरेब को जानता हूं।


तुम्हें कहने की जरूरत नहीं है 

मैं इश्क वाला रंग पहचानता हूं।



Dr Manish Kumar Mishra

Assistant professor

Department of Hindi

K.M.Agrawal College

Kalyan west

Maharashtra 

Two days online international Conference

 International Institute of Central Asian Studies (IICAS), Samarkand, Uzbekistan (by UNESCO Silk Road Programme ) Alfraganus University, Tas...