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मई, 2013 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

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आवारगी - 10

                              कोई शिकवा ना कोई गिला है                क्या कहूँ तुमसे क्या-क्या मिला है                याद तुझको बहुत यूं तो करता हूँ लेकिन ,                तुझसे कभी भी , कुछ ना कहा है                   मुझको अभी भी तु चाहता है                इसी बात से ख़ुद को बहला लिया है                तेरे सवालों में उलझा हूँ ऐसे                जैसे कि कोई , ब्रम्ह दर्श...

आवारगी -09

                                        थोड़ी सी जिस्मानी ,   थोड़ी रूहानी है              मोहब्बत थोड़ी भोली , थोड़ी सयानी है              थी हक़ीक़त मगर मैं कहता रहा              यह झूठ है सब , झूठी पूरी कहानी है              अब भी याद है मुझे वो लड़की              जिसकी फ़ोटो मेरे पास है , पर पुरानी है                           सुना है कि वो इसी शहर में हैं    ...

आवारगी -08

                                                  दरमियाँ हमारे कुछ बचा सा है                  कुछ सुना , कुछ अनसुना सा है                  है मोहब्बत या मोहब्बत कि कसक                  दिल में कोई तूफ़ान , रुका सा है                  ये जो इतनी याद आती हो तुम                  चाहतों में दिल कुछ बहका सा है                  मेरे ख़्वाबों से ...

राधा रानी

भारत में किशोर लड़कियों की तस्करी

भारत देश में बाल अपराध से संबंधित जिस तरह के आंकड़े और जैसी खबरे लगातार सामने आ रही हैं वे धर्म और दर्शन की इस धरा के लिए अभिशाप हैं । नैतिकता का पतन , आर्थिक विषमता और गरीबी के साथ-साथ विक्षिप्त मानसिकता और भोग –विलाश पूर्ण जीवन शैली  इस अपराध के मूल में है । किशोर उम्र की लड़कियों की हालत तो अधिक चिंतनीय है । गरीब और मासूम किशोर लड़कियों को धोखे से देह-व्यापार की मंडी में चंद रुपयों के लिए झोंक दिया जा रहा है , तो दूसरी तरफ किशोर लड़कियों को एक ऐसा बड़ा वर्ग भी है जो शहरों में रहते हुए कम उम्र और फैशन की चका-चौंध में सारी नैतिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर लगभग अपनी मर्जी से देह व्यापार के इस दलदल में फसती जा रहीं हैं। शहरों की तेज रफ्तार जिंदगी में माँ-बाप भी जीविकोपार्जन के संसाधन जुटाने में ही अपना काफी समय खर्च करने को मजबूर हैं। बच्चो की आवश्यकताओं की पूर्ति करते हुए शायद वे यह भूल जाते हैं कि बच्चों के लिए उनका स्नेह , दुलार और मार्गदर्शन भी बहुत जरूरी है । अपनी जरूरतों और अपनी मजबूरियों के बीच पिस रहे माँ-बाप चाह कर भी अधिक कुछ नहीं कर पाते। संयुक्त परिवार की संकल्पना श...

नहीं रहे असगर अली इंजीनियर

 इस्लाम के प्रसिद्ध विद्वान असगर अली इंजीनियर का मंगलवार को लंबी बीमारी के बाद यहां निधन हो गया। पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि 73 वर्षीय इंजीनियर की मृत्यु आज सुबह मुंबई  के उपनगर सांताक्रूज  स्थित उनके आवास पर हुई। इंजीनियर के परिवार में एक बेटा और एक बेटी है। वर्ष 1940 में जन्मे इंजीनियर ने विक्रम यूनिवर्सिटी से सिविल इंजीनियरिंग में बीएससी किया था। वर्ष 1980 से वे ‘द इस्लामिक पर्सपेक्टिव’ नामक पत्रिका का संपादन करने लगे और 1980 के दशक में ही उन्होंने भारत में इस्लाम और सांप्रदायिक हिंसा पर किताब भी लिखी। यह किताब आजादी के बाद के भारत पर शोध पर आधारित था। वर्ष 1987 में उन्हें यूएसए इंटरनेशनल स्टूडेंट एसेंबली और यूएसए इंडियन स्टूडेंट एसेंबली की तरफ से प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वर्ष 1990 में उन्हें सांप्रदायिक सौहार्द के लिए डालमिया पुरस्कार से सम्मानित किया गया और डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान की गई। वर्ष 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद इंजीनियर की प्रेरणा से सेंटर फॉर स्टडी ऑफ सोसायटी एंड सेकुलरिज्म (सीएसएसएस) नामक संगठन की स्थापना की गई, जि...

जहाँ साँझ-सी जीवन-छाया

ले चल वहाँ भुलावा देकर मेरे नाविक ! धीरे-धीरे । जिस निर्जन में सागर लहरी, अम्बर के कानों में गहरी, निश्छल प्रेम-कथा कहती हो- तज कोलाहल की अवनी रे । जहाँ साँझ-सी जीवन-छाया, ढीली अपनी कोमल काया, नील नयन से ढुलकाती हो- ताराओं की पाँति घनी रे । जिस गम्भीर मधुर छाया में, विश्व चित्र-पट चल माया में, विभुता विभु-सी पड़े दिखाई- दुख-सुख बाली सत्य बनी रे । श्रम-विश्राम क्षितिज-वेला से जहाँ सृजन करते मेला से, अमर जागरण उषा नयन से- बिखराती हो ज्योति घनी रे !                                 - जयशंकर प्रसाद 

माँ जब आँचल में छुपा लेती है

मुझे हर मुसीबत से बचा लेती है  माँ जब  आँचल में छुपा लेती है  मीलों पैदल मुझे सीने से लगाए  उतरवाने मेरी नज़र चल देती है  वो मेरी खुशियों के खातिर ही तो  जाने कितने उपवास कर लेती है  छुप के दबे पाँव भी घर आऊँ तो  वो मेरी हर आहाट पहचान लेती है   लगता है अपनी  हर साँस के साथ वो मेरे हक़ में दुआएँ मांग लेती है  मेरी जरूरतों से कहीं जादा,बहुत जादा  माँ अपना प्यार मुझपे लुटा देती है  प्यार,विश्वास ,समर्पण और मूल्य इसकी मिसाल माँ में दिख जाती है 

माँ को सलाम

आवारगी 07

                 शायद हमारे बीच में कोई रिश्ता है                  राधा और कृष्ण सा कोई किस्सा है                  जब कोई पूछता है तेरे बारे में                  कह देता हूँ कि - मेरी जिज्ञासा है                  अपनी –अपनी मर्यादाओं में                  हम दोनों की ही अभिलाषा है                    अनुबंधों के संबंधों से परे कहीं              ...