Showing posts with label किसी से कह नहीं सकता. Show all posts
Showing posts with label किसी से कह नहीं सकता. Show all posts

Saturday, 25 June 2011

शिकायत सब से है लेकिन,किसी से कह नहीं सकता

जो कहनी थी ,वही मैं बात,यारों भूल जाता हूँ .
किसी क़ी झील सी आँखों में, जब भी डूब जाता हूँ .

नहीं मैं आसमाँ का हूँ,कोई तारा मगर सुन लो
किसी के प्यार के खातिर,मैं अक्सर टूट जाता हूँ .

शिकायत सब से है लेकिन,किसी से कह नहीं सकता
बहुत गुस्सा जो आता है,तो खुद से रूठ जाता हूँ .

किसी क़ी राह का कांटा,कभी मैं बन नहीं सकता
इसी कारण से मफिल में,अकेला छूट जाता हूँ .

मासूम से सपनों क़ी मिट्टी,का घड़ा हूँ मैं,
नफरत क़ी बातों से,हमेशा फूट जाता हूँ .

लिखे हुए शब्दों से वीडियो तक: Text-to-Video AI की नई दुनिया और हिन्दी के लिए उसकी संभावनाएँ

  लिखे हुए शब्दों से वीडियो तक: Text-to-Video AI की नई दुनिया और हिन्दी के लिए उसकी संभावनाएँ प्रस्तावना कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने पिछले कुछ वर...

Popular Posts