इंतजार कभी खतम नही होता , मोहब्बत का दूसरा अर्थ नही होता ; ऐतराजों का राज कैसे जाने , ना शब्द कभी हजम नही होता / तेरी खामोशी के हजार मतलब होंगे , तेरी हँसी के खास मतलब होंगे ; तेरी हया है तेरी खामोशी अगर ; मोहब्बत के हजार परवाने होंगे ; आखों की बातें उलझाती हैं, चुप्पी तेरी उकसाती है ; शर्म है या इकरार है वो ; खामोशी तेरी तड़पाती है /
हिन्दी साहित्य, भाषा-विज्ञान, समाज-विज्ञान, भारतीय संस्कृति और सिनेमा पर प्रामाणिक शोधपरक आलेख। संपादक: डॉ. मनीष कुमार मिश्रा।