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“October Us Saal” touches the heart and soul of its readers - Kakoli Kalita

                                 Collection of poems “October Us Saal’ / अक्टूबर उस साल     By Assistant Prof. Dr. ManishKumar C. Mishra , at K.M. Agr a wal College, Kalyan (W), Mumbai since 2010. He was accolade consecutively for two years as Research Awardee by University Grants Commission (UGC) He is also associated with Indian Institute of Advanced Studies (IIAS), Shimla as an Associate.   His insightful work in the field of Hindi Literature if I and his passion towards it has been nationally and internationally acclaimed. This book is published in year 2019 by shabdshrishti, New Delhi. ISBN is 978-81-88077-79-3                                    To...

कवि मनीष : नई संभावनाओं का पुंज । - श्रीमती रीना सिंह

कवि मनीष :  नई संभावनाओं का पुंज ।                           श्रीमती रीना सिंह                            सहायक प्राध्यापिका                            हिन्दी विभाग                            आर के तलरेजा महाविद्यालय                             उल्हासनगर, महाराष्ट्र । मनीष के दो कविता संग्रह आ चुके हैं । वर्ष 2018 में प्रथम कविता संग्रह , अक्टूबर उस साल और 2019 में इस बार तुम्हारे शहर में । इन्हीं दो कविता संग्रहों के आधार पर मैं मनीष की कविताओं के संदर्भ में अपनी राय इस आलेख के माध्यम से प्रस्तुत करूंगी ।  ‘जब कोई किसी को याद करता है’ कविता  में कवि अपनी प्रियतमा के वियोग में विह्वल है । उसने सुन रखा है कि किसी को याद कर...

कवि मनीष : व्यक्तित्व और कृतित्व । - डॉ शमा

कवि मनीष : व्यक्तित्व और कृतित्व । डॉ मनीष कुमार मिश्रा का जन्म 09 फ़रवरी सन1981 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के पूरा गंभीर शाह (सुलेमपुर ) नामक गांव में हुआ । आप के पिता श्री छोटेलाल मिश्रा जी कल्याण पश्चिम, महाराष्ट्र के महंत कमलदास हिंदी हाई स्कूल में प्राथमिक विभाग में शिक्षक की नौकरी करते थे । आप की माता श्रीमती अद्यावती देवी एक गृहणी थी । आप का बचपन मां के साथ ही बीता । गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में आप की शिक्षा प्रारंभ हुई लेकिन जल्द ही आप अपनी माता व बड़े भाई राजेश के साथ कल्याण महाराष्ट्र पिता के पास आ गए । यहीं से विधिवत कक्षा एक में आप का प्रवेश सन 1986 में महंत कमलदास हिंदी हाई स्कूल, कल्याण पश्चिम में हुआ । इस् तरह विधिवत आप की शिक्षा प्रारंभ हुई । पिता जी इसी विद्यालय में शिक्षक थे अतः हमेशा अनुशासन में रहने की हिदायत मिलती रहती । आप ने सन 1996 में यहीं से प्रथम श्रेणी में हाई स्कूल की परीक्षा पास की । आगे की पढ़ाई के लिए आप ने कल्याण पश्चिम में ही स्थिति बिर्ला महाविद्यालय में कला संकाय में प्रवेश लिया । आप प्रथम श्रेणी में हाई स्कूल पास हुए थे अतः ...

कविता के इस घटाटोप में स्वागत है, ' मनीष '।

 "लौटने की क्रिया जीवन व्याकरण की सबसे जटिल क्रिया है"                                                                                     अनन्त द्विवेदी                                                                                     साकेत कॉलेज, कल्याण पूर्व 21 वीं सदी के दूसरे दशक का अंतिम दौर, हिंदी कविता में एक नए कवि की आमद , एक ज़रूरी आमद। आखिर ऐसी आमदें ज़रूरी क्यों हो जाती हैं, कि कविता इतिहास ना हो जाये।  बीते साल में मनीष के दो काव्य संग्रह प्रकाशित हुए 2018 में ' इस बार तुम्हारे शहर में ', और 'अक्टूबर उस साल' 2019 में। एक सर्जनशील के लिए बीतत...

प्रेम और संवेदना के जैविक कवि : मनीष

प्रेम और संवेदना के जैविक कवि : मनीष डॉ . चमन लाल शर्मा प्रोफेसर 'हिन्‍दी' शासकीय कला एवं विज्ञान स्‍नातकोत्‍तर महाविद्यालय , रतलाम (विक्रम विश्‍वविद्यालय , उज्‍जैन) मध्‍य प्रदेश मो. 9826768561 E-mail- clsharma.rtm@gmail.com               आजकल कविता में जो कुछ लिखा जा रहा है वह सब समकालीन है , यह पूरी तरह सच नहीं है। दरअसल समकालीनता एक रचना दृष्टि है , जहां कवि अपने समय का आकलन करता है , अपने अनुभव , अपने चिंतन और अपनी दृष्टि से वह कविता में जीवन का नया विन्यास गढ़ता है। कवि होने के अपने खतरे भी हैं , अपनी चुनौतियां भी हैं , क्योंकि कई बार कविता में   वैयक्तिकता हावी हो जाने की संभावना बनी रहती है। यकीनन कविता का आशय या उद्देश्य इतना भर नहीं है कि समाज में जो कुछ भी घटित हो रहा है या जैसा दिखाई दे रहा है उसे ज्यों का त्यों लिखकर प्रस्तुत कर दिया जाय , इससे कविता के खत्म होने का खतरा बढ़ जाता है। एक कविता पाठक को कई अर्थ देती है। कविता एक वैचारिक फलक के साथ-साथ एक कला रूप भी है , इ...