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न दूरियां ना इतिहासों की बात थी यूँ .

परछाइयों का  साथ  है  यूँ ,  न  अकेलापन  न  कोई  साथ  है  यूँ  , चंद  शब्दों  अहसासों  की  बात  थी  यूँ , न  दूरियां  ना इतिहासों की बात थी  यूँ . ===============================   यादें  कुछ  धूमिल  है  खुशियाँ  रिमझिम  है  , गुजरे  वक़्त  के  कारवां  में  कितनी  हकीकते  गुमसुम  है  , ===========================================  शरारत  तू  इसे  कह  ले ,  इबादत  तू  इसे  कह  ले , चल  ज़माने  की  गर  रश्मों  से  ,   बेगैरत तू  इसे  कह  ले  , मोहब्बत  है  तू  मेरी  ,  चाहत  तू  इसे  कह  ले  , रिश्तों  की  बंदिशों   में  हो  उलझे  , जरूरत तू इसे  कह  ले . ============================

बड़ी शिद्दत से बैठा वो ताकता रहा

बड़ी शिद्दत  से  बैठा  वो  ताकता  रहा  , अपने  बच्चों  द्वारा  मात पिता  की  बेइज्जती   बैठा  सराहता  रहा  , बड़ी शिद्दत  से  बैठा  वो  ताकता  रहा शायद  वो  लफ्ज  उसके  थे  मुंख   से  बच्चों  के  निकले  थे ,   भाव  उसके  मन  के  उसके  बच्चों  ने  कहे  थे  , चुपचाप  बैठा  वो  ताकता  रहा  .  उम्र  दराज  पिता  से  हो  रही  बद्दतमीजी को  निहारता  रहा  ,   बड़ी शिद्दत  से  बैठा  वो  ताकता  रहा पिता  के  चंद बसंत  ही  बचे  हो  , अब क्या लेने जैसा जो बचा हो ,  और  कुछ  दे  सके  उन  बुड्ढी  हड्डियों  में  दम  कहा , बच्चों  संग  अभी  बरसों  पड़े  है ,  इस  स्वार...

पथरीली पगडंडी पे काटों से राहत है /

न गम ही है तेरा , न तेरी ख़ुशी है , न आखों में आंसू , न मुख पे हंसी है ; न मंजिल की चाहत , न राहें थमी  हैं ; कैसी जिंदगानी ये कैसी कमी है  / विस्मित अँधेरा है ,साये ने घेरा है  परछाई है व्याकुल अँधेरा ही अँधेरा है ; तारो की टिमटिमाहट है कैसी ये चाहत है , पथरीली पगडंडी पे काटों से राहत है /

आखों में तेरे खोया हूँ अब तक,

आखों में तेरे खोया हूँ अब तक, कितनी ही रातें न सोया हूँ  अब तक , जागे हुए सपनों की बातें करूँ क्या , न पूरी हुई मुलाकाते वो कहूँ क्या , बाँहों का घेरा था कितना अकेला था खिलता अँधेरा था तन्हायी  ने  घेरा था यादें महकी थी आहें बहकी थी गमनीन सीरत थी तू बड़ी खुबसूरत थी फिजा गुनगुनायी थी चाहत सुगबुगाई थी तू मन मंजर पे छाई थी तू न मेरी हुई न परायी थी   किस्से अधूरे हैं वाकये न पूरे हैं जीवन के लम्हे है हंसते और सहमे है

जिंदगी तुझमे ही हूँ खोया सुबह हो या शाम

बड़ा सुख है तेरी आगोस में ऐ जिंदगी  इन हवाओं में मन की सदाओं तू है  ऐ जिंदगी  हकीकते नागवार हो तकलीफें हजार हो मेरी हर साँस का तुम  ख्वाब  हो ऐ जिंदगी    उजला आसमान  औ हवाएं मध्यम या काली घटायें औ बरसती सरगम  उत्तेजित  सूरज या मुस्काता चाँद जिंदगी  तुझमे रमता मन सुबह हो या शाम

पर मिल ना पाया जिंदगी का फलसफा ,

कुछ  आंसू  बहे  कुछ  दिल पिघला  , पर  मिल  ना  पाया  जिंदगी  का  फलसफा  , तड़पते  रहे  अरमान  बेचारे , नसीब  ही  है  शायद   कुछ  ऐसे   हमारे

दिल कह रहा पुकार लूँ तुझको

दिल कह रहा पुकार लूँ तुझको रेशमी बालों को सँवार दूँ फिर से अहसास कहे है तेरी तनहाई मौसम ने ली है फिर अंगडाई ह्रदय भ्रमित है किस राह को जावे क्या कर दे की प्यार को पावे साँस रुकी है पल स्थिर है नम आखें और ह्रदय व्यथित है   क्या कहूँ मै तुझको या चुप बैठूं थामू मै धड़कन या सपनों को बहकूँ  निहार रहा बंद आखों से तुझको  आंख खोल क्या मै तुझको देखूं  दुविधा है फैली चहुँ ओर  किस बंधन से बंधी है डोर  चाह ना छोड़े अपनी आशा  तू ना बदले अपनी भाषा  राह चल रही औ मै स्थिर हूँ  भाव तेरा फिर भी काफ़िर हूँ ? दिल कह रहा पुकार लूँ तुझको रेशमी बालों को सँवार दूँ फिर से  

उम्र बड़ी आशाएं घटी

उम्र बड़ी आशाएं घटी कुछ पल मुस्काए कुछ आंसू लाये कभी सजी जीवन  की सरगम कभी सताए दुःख औ क्रंदन एक जीवन में  जिए हम कितने जनम घटती सांसे औ बड़ता बंधन

एक वक़्त हुआ हमको जिए

आखों  के आंसूं सूखें है   गम का अधियारा बाकी है एक वक़्त हुआ हमको जिए सांसों का थमना बाकी है दुनिया को मै हार भी जाता पर तुझको बाँहों में भरना बाकी है जीवन को मै त्याग  भी जाता पर अरमानो को जीना बाकी है आखों के आंसूं सूखें है गम का अधियारा बाकी है एक वक़्त हुआ हमको जिए सांसों का थमना बाकी है

जख्म भरने है लगा कोई नया तू घाव दे दे

दर्द सहन होने लगा कोई नया अभाव  दे दे जख्म भरने है लगा कोई नया तू घाव दे दे सूखे आखों के आंसूं दिल चिचुक गया प्यास से सांसे ना उखड़ी अब तलक तू नयी कोई फाँस दे दे धड़कन है मध्यम आस भी नम बोझिल है आहें आभास भी कम   संभल रहे लड़खड़ाते कदम है छंट रहे कितने भरम है अब भावों को नया भूचाल दे दे तकलीफों को नयी चाल दे दे  जिंदगानी  को बिखराव  दे दे राहों को कोई  भटकाव दे दे दर्द सहन होने लगा कोई नया अभाव दे दे जख्म भरने है लगा कोई नया तू घाव दे दे