कल महीनो बाद , वही फोन आया जिसका इन्तजार था
कुछ गिले- शिकवों के बाद, मेरे लिए एक समाचार था .
वो अब, जब, हो गए हैं किसी और के तो,बताना नहीं भूले
कि मैं उनका एक दोस्त रहा, जो मोहब्बत में वफादार था.
प्रेम और संवेदना के जैविक कवि : मनीष डॉ. चमन लाल शर्मा प्रोफेसर ' हिन्दी ' शासकीय कला एवं विज्ञान स्नातकोत्तर महावि...