कल महीनो बाद , वही फोन आया जिसका इन्तजार था
कुछ गिले- शिकवों के बाद, मेरे लिए एक समाचार था .
वो अब, जब, हो गए हैं किसी और के तो,बताना नहीं भूले
कि मैं उनका एक दोस्त रहा, जो मोहब्बत में वफादार था.
हिं दी के पक्ष में जिस भावुकता के साथ तर्क रखे जाते हैं उन्होंने हिंदी का कोई भला नहीं किया अपितु नुकसान ही अधिक हुआ । हिंदी की ...