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पति पत्नी का रिश्ता हो मिनट का पल का या हो दिन महीने साल का

पति पत्नी का रिश्ता हो मिनट का पल का या हो दिन महीने साल का मिटा सके ये इतना बस नहीं है काल का ; शिव की भभूती औ  माता का सिंदूर भरा था औ भाव अटूट प्यार का तब मांग भरी थी तेरी मैंने इश्वर स्वयम गवाह था , कैसे भूलूं वो घड़ियाँ मैं आंसूं से सींचा था रिश्ता प्यार का , झूठ कहे या भूले तू पर ये रिश्ता मेरे हर जनम हर सांस का ; भाव से बड़कर क्या दुनिया में प्यार से अच्छा क्या इन्सा में सही गलत उंच नीच का फैसला कोई कैसे करे है है मोहब्बत खुदा का जज्बा उसे बुरा कैसे कहे है / राधा कृष्ण भजते सभी हैं द्रौपदी को कहते सती हैं   रीती में उलझे है क्यूँकर प्रीती बिन जीना हो क्यूँ कर प्यार से बड़कर पूजा नहीं कोई इस जगत इस संसार में क्यूँ झिझक कैसी ये दुविधा क्या मैं नहीं तेरे दिल की छाँव में सरल नहीं  है राह  प्रीती की पर सरल कहाँ जीना संसार में क्यूँ हो अब तक तू उलझी क्या कमी रही मेरे  प्यार में ; प्यार को रब समझा और तुझको जिंदगी मेरे जीने का उद्देश्य तू ही है तेरी करूँ मै बंदगी / नाम ले मेरा या पति कह ले या कुछ भी कह के पुकार ले मेरा जीवन तेरा साँसे तेर...

दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी

दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी                     शहरीकरण का प्रभाव - इस विषय पर  दिनांक-२४-२५ जनवरी को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित क़ी जा रही है. इस  संगोष्ठी में देश भर से  करीब  ३०० विद्वान शामिल होंगे. यदि आप इसमें भाग लेना चाहते हैं तो कृपया संपर्क करें .

डॉ.विद्या बिंदु सिंह क़ी कहानी -हड़ताल

डॉ.विद्या बिंदु सिंह क़ी कहानी -हड़ताल

कुछ तो कहो, कुछ तो लिखो ;

कुछ तो कहो, कुछ तो लिखो ; सजाई है जब एक महफ़िल , महफ़िल में कभी तो खिलो ; क्यूँ चुप हो ,क्या बात है, क्यूँ मुद्दे नहीं मिलते ; जीवन का हर पल एक बात है ,क्यूँ बात नहीं करते ; चुप रहने से कुछ हासिल नहीं होता , बिना अपनी बात कहे, समाज के बदलाव में शामिल नहीं होता ; गर चीजें बदलनी है बेहतरी के लिए , खुल के कहो बात अपनी ,देश की तरक्की के लिए

फ्रेंच भाषा भी खूब है पर मुझसे कितनी दूर है

जिंदगी गुजर रही अब नए आशियाने में , सीख रहे हर पल कुछ नया जिंदगी नए पैमाने में  सोना वही है जागना वही है पर साथ नए अनजाने है दूर देश में बैठे हम आये यहाँ कमाने हैं / फ्रेंच भाषा भी खूब है पर मुझसे कितनी दूर है  भरमाती है तड़पाती है  है और बड़ा तरसाती है , भागा पीछे वो आगे भागे अलसाया तो वो मुस्काए  नजर मिलाये पास बुलाये नित नए वो ठौर दिखाए  फ्रेंच भाषा भी खूब है पर कितनी दूर है 

NET or SLET mandatory for appointment of lecturers

Observing that “the courts should not venture into academic arena which is best suited for academician and experts”, the Delhi High Court has upheld the mandatory requirement of clearing the National Eligibility Test (NET) or the State Level Eligibility Test (SLET) for appointment to the post of lecturer. The University Grants Commission had framed this rule called Regulations-2009 in July last year. However, those who have secured a Ph.D. degree in compliance with the UGC Regulations-2009 (Minimum Standards and Procedure for award of Ph.D.) are exempted from this rule. The judgment by a Division Bench of the Court comprising Justice Dipak Misra and Justice Manmohan came on a petition by the All India Researchers' Co-ordination Committee challenging the Constitutional validity of fixing the minimum eligibility requirement for appointment as a lecturer. Counsel for the petitioner, Amit Kumar, had challenged the rule mainly on the ground that the UGC had framed it on a direction by t...

भारतीय लोक साहित्य पर रास्ट्रीय संगोष्ठी

भारतीय लोक साहित्य पर रास्ट्रीय संगोष्ठी ;                                   दिनांक २७-२८ जनवरी २०११ को फरुखाबाद में दो दिवसीय रास्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित क़ी जा रही है. संगोष्ठी का विषय है लोक साहित्य .  आप सभी इसमें  आमंत्रित हैं.

हिंदी विवेक

  हिंदुस्थान प्रकाशन संस्था के अंतर्गत चलनेवाले उपक्रम   हिंदी विवेक मुख्य कार्यालय : ५/१२, कामत इंडस्ट्रीयल इस्टेट, ३९६ स्वा. वीर सावरकर मार्ग, प्रभादेवी, मुंबई - ४०००२५. दूरध्वनी : ०२२-२४२२१४४०, २४२२५६३९, फॅक्स : ०२२-२४३६३७५६. प्रशासकीय कार्यालय : हिंदुस्थान प्रकाशन संस्था, विवेक भवन (कृष्णा रिजेन्सी), १२ वा मजला, प्लॉट क्र. ४०, सेक्टर क्र. ३०, सानपाडा (प), नवी मुंबई - ४००७०५. दूरध्वनी : ०२२-२७८१०२३५/३६, फॅक्स : ०२२-२७८१०२३७. विभागीय कार्यालय : पुणे : वीरेंद्र हाईट्स, तिसरा मजला, ५५७, सदाशिव पेठ, लक्ष्मी रोड, पुणे - ३०. दूरध्वनी : २४४८१३९२. देवगिरी : राज हाईट्स, पहिला मजला, सी-विंग, फ्लॅट क्र. १०१, एम.जी.एम. हॉस्पिटल समोर, सेवन हिल्स, संभाजीनगर, (औरंगाबाद), दूरध्वनी : ०२४०-२४८७७११. रत्नागिरी : कापडी एनक्लेव, बी-४, दुसरा मजला, गयालवाडी गेट जवळ, रत्नागिरी-कोल्हापुर रोड, खेडशी, ता.जि. रत्नागिरी - ४१५६३६. गोवा : पालमर प्रिमायसेस कॉ-ऑप सोसायटी, शॉप क्र. जी एस-१५, पत्रकार कॉलनी, जीएचबी, कमर्शियल कम रेसिडन्स कॉम्प्लेक्स, अल्तो-पर्वरी, बारदेश, गोवा - ४०...

निस्पृह शिक्षाव्रती डा. आर. बी. सिंह-उमेश सिंह

देश के समग्र विकास के लिए नागरिकों का शिक्षित होना परमावश्यक है। इसी बात को ध्यान में रखकर प्राय: सभी चिन्तकों, सामाजिक सुधारकों और शिक्षाविदों ने शिक्षा को सर्वोपरि स्थान दिया है। यह बात अलग है कि अनेक प्रकार के सरकारी और निजी स्तर पर किए गए शिक्षा सुधार के कार्यों के बावजूद आज भी देश की जनता का एक बडा भाग निरक्षर है। शहरों से दूर ग्रामीण भागों में विद्यालयों का अभाव है। प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों की व्यवस्था और रखरखाव ही नहीं, वहां पर दी जाने वाली शिक्षा का स्तर भी ठीक नहीं है। दुर्दैव से शिक्षा के लिए सरकारी बजट में बहुत कम धन आवंटित किया जाता है। सरकारी स्तर पर शिक्षा के प्रति उदासीनता सर्व विदित है। ऐसे अनेक शिक्षा सेवियों और समाज के समृद्धजनों के प्रयास से अनेक शिक्षा संस्थाओं की स्थापना की गयी है। जिनके माध्यम से शहरी और ग्रामीण बच्चों और युवकों को शिक्षा का लाभ मिल रहा है। इन शिक्षासेवी महानुभावों ने समाजसेवा का जो मार्ग चुना है वह किसी भी अन्य कार्य से अधिक महत्त्वपूर्ण है। ऐसे ही समाजसेवी और नि:स्पृह शिक्षाव्रती हैं कल्याण के डा. आर. बी. सिंह उन्हें स्नेह से ...

नया शहर नया बसेरा है /

यादों  की महफ़िल है काम का है दौर , जीवन की प्रक्रिया का बदलना है ठौर ; नए लोंगों से मुलाकाते हैं कुछ पुरानी कुछ नयी बातें हैं  कुछ लम्हे गुनगुनाते हैं कुछ पल मुस्कुराते हैं नयी सुबहे औ नया सबेरा है नया शहर नया बसेरा है /

Financial Support FROM U.G.C. FOR RESEARCH WORK

Tenth Plan Guidelines Financial Support Research Funding Council for Major and Minor Research Projects during the Tenth Plan Period Eligibility: Teachers (including retired up to 70 years) of Universities / Colleges under Section 2(f) and 12 B Purpose: For research Amount Ceilings: Rs. 12 / 10 lakh for major & Rs. 1 lakh for minor projects See guideline details. Annexures Format for Submission of Proposal for Major Research Project Format for Submission of Proposal for Minor Research Project Annual/Final Report Utilization Certificate Statement of Expenditure in respect of Major/Minor Research Project Statement of Expenditure incurred on Field Work Major Research Project Copy of the Specimen of House Rent for Research Associate/Project Associate Acceptance Certificate for Research Project Proforma for Submission of Information at the Time of Sending the Final Repor...

हमारा लोक-साहित्य: लावनी -डा नवीनचंद्र लोहानी

हमारा लोक-साहित्य: लावनी -डा नवीनचंद्र लोहानी लोक-साहित्य में लोक-गीतों का विशिष्ट स्थान है। लोक-गीत परंपरा प्रवाही और लिखित दो रूपों में मिलती हैं। लिखित लोक-गीतों को लावनी कहा गया। लावनी का संबंध जातियों, वर्गों और अनेक भाषाओं से रहा है। लोक-साहित्य के अंतर्गत यह एक पृथक विधा है जिसकी विशेषता भावुकतापूर्ण, भावात्मक एवं लयात्मक उद्गार है। भारत के अनेक नगरों, कस्बों एवं ग्रामों में इसका प्रचलन रहा है। धार्मिक, सामाजिक एवं नैतिक पथ प्रदर्शक के रूप में इसकी ...

देखो क्या बनती है नयी कहानी

नयी राह चली है नयी मंजिल पानी , जीवन की है नयी रवानी , क्या पाया क्या खोया अब तक बात रही सब वो बेमानी नयी राह चली है नयी मंजिल पानी गाँव हैं छोड़ा देश है छोड़ा नया भेष है नया है डेरा लोग नए हैं भाषा न्यारी पर लगती है वो बोली प्यारी नयी राह चली है नयी मजिल पानी देखो क्या बनती है नयी कहानी   

NATIONAL SEMINAR

कुछ सही होगा,कुछ तो गलत होगा

कुछ सही होगा,कुछ  तो गलत होगा  पूरा इसी तरह ,मुकम्मल हिसाब होगा  

डॉ.विद्या बिंदु सिंह के हाइकू

   

डॉ.विद्या बिंदु सिंह : एक परिचय

हंस भी लेती है वो मन ही मन

शादी की चौदहवीं सालगिरह है सुबह से वो व्यस्त रात तक है पति आज भी खाली हाथ ही है आज उसका उपवास भी है कर्मिणी है धर्मिणी है काम में अपने गुणी है बात में मीठापन नहीं है कर्कशा भी वो नहीं है खीज के रह गयी है पति से बहस हो गयी है सालगिरह  आंसूं में कटी है सुबह फिर जिंदगी सर पे खड़ी है /  संघर्षमय जीवन रहा है माता का वियोग सहा है पति का व्यवहार सरल है घर में उसका कब  चला है नौकरी वो कर रही है बेटा औ बेटी की धनी वो चिडचिडा जाती है उनपे शरीर की सीमा पे खड़ी है पाले में उसके  कम भाग्य  आया पति ने भी कहाँ पैसे कमाया कुढ़ रही मन ही मन वो गुस्सा निकाले पति पे सब वो जिंदगी से नहीं है हार मानी  उसके जीवट की भी है एक कहानी   सँवार रही है वो बच्चों का बचपन हंस भी लेती है वो मन  ही मन

जिंदगी तुझमे ही हूँ खोया सुबह हो या शाम

बड़ा सुख है तेरी आगोस में ऐ जिंदगी  इन हवाओं में मन की सदाओं तू है  ऐ जिंदगी  हकीकते नागवार हो तकलीफें हजार हो मेरी हर साँस का तुम  ख्वाब  हो ऐ जिंदगी    उजला आसमान  औ हवाएं मध्यम या काली घटायें औ बरसती सरगम  उत्तेजित  सूरज या मुस्काता चाँद जिंदगी  तुझमे रमता मन सुबह हो या शाम

VERY Important INFO about Water Bottle

    

ATM OPERATIONS CAN BECOME A SECURITY SITUATION

HELLO, ATM OPERATIONS CAN BECOME A SECURITY SITUATION. PLEASE NOTE THE TIP BELOW… VERY IMPORTANT AND INTERESTING Read carefully WHEN A THIEF FORCES YOU TO TAKE MONEY FROM THE ATM, DO NOT ARGUE OR RESIST, YOU MIGHT NOT KNOW WHAT HE OR SHE MIGHT DO TO YOU. WHAT YOU SHOULD DO IS TO PUNCH YOUR PIN IN THE REVERSE, I.E.. IF YOUR PIN IS 1254, YOU PUNCH 4521. THE MOMENT YOU PUNCH IN THE REVERSE, THE MONEY WILL COME OUT BUT WILL BE STUCK INTO THE MACHINE HALF WAY OUT AND IT WILL ALERT THE POLICE WITHOUT THE NOTICE OF THE THIEF. EVERY ATM HAS IT; IT IS SPECIALLY MADE TO SIGNIFY DANGER AND HELP. NOT EVERYONE IS AWARE OF THIS.

अंतर राष्ट्रीय हिंदी संगोष्ठी का आयोजन मुंबई में

अंतर राष्ट्रीय हिंदी संगोष्ठी का आयोजन मुंबई में :-                             दिनांक २ ,३ और ४ दिसम्बर को मुंबई के साठे महाविद्यालय में यू.जी.सी., महाराष्ट्र हिंदी अकादमी और अयोध्या शोध संसथान के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय अंतर   राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है. आप भी इस संगोष्ठी में सहभागी हो सकते हैं. इस सम्बन्ध में अधिक जानकारी के लिए साथ में दिए गए संगोष्ठी पत्र के पते पर संपर्क किया जा सकता है.  

जिंदगी तेरी पगडण्डी फिर चल आया मै ,

जिंदगी तेरी पगडण्डी फिर चल आया मै , जिंदगी तेरी बंदगी फिर कर आया मै खुदा बसता है जमीं पे यकीं न था तेरी राहों में खुदा देख आया मै तेरी मोहब्बत तो शामिल है मेरे रग रग में तेरी चाहत असीम है मेरे हर पल में तड़प गम  ख़ुशी सब अमानत तेरी जिंदगी जिन्दा हूँ मै तेरी जफ़ाओं में /

पर मिल ना पाया जिंदगी का फलसफा ,

कुछ  आंसू  बहे  कुछ  दिल पिघला  , पर  मिल  ना  पाया  जिंदगी  का  फलसफा  , तड़पते  रहे  अरमान  बेचारे , नसीब  ही  है  शायद   कुछ  ऐसे   हमारे

याद तो आती ही है

याद तो आती ही है  ----------  आती-जाती हर सांस के साथ ,  बीते हुवे कल क़ी बात के साथ, किताबों  में सूखे गुलाबों के साथ , जागती  आँखों के भीगे हुवे ख्वाबों के साथ,  याद तो  आती  ही है .                 

~इंटरनेट पर हिन्दी के उपयोगी टूल~

~इंटरनेट पर हिन्दी के उपयोगी टूल~ महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी की स्थापना 1982 में तत्कालीन विधायक तथा हिन्दी साहित्यकार-पत्रकार डॉ॰ राममनोहर त्रिपाठी की अध्यक्षता में हुई, किंतु आवश्यक अनुदान, कर्मचारी और कार्यालय के अभाव में कोई काम नहीं हो सका और त्रिपाठीजी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। पुनः 1986 में प्रा॰ राम मेघे की अध्यक्षता में, जो महाराष्ट्र में शिक्षा मंत्री थे, अकादमी का पुर्नगठन हुआ। 'महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी' का आधारभूत उद्देश्य है हिन्दी के मंच से राष्ट्रीय एकता के लिए काम करना। इस उद्देश्य को दृष्टि में रखकर 'हिन्दी अकादमी' हिन्दी भाषा एवं साहित्य की प्रोन्नति के लिए केन्द्र तथा राज्य सरकारों द्वारा निर्धारित योजनाओं का यथारूप राज्य में कार्यान्वन करती है। इसी  संस्था क़ी तरफ से इन्टरनेट पर काम करने क़ी आसन विधियों को लेकर काम किया जा रहा है . जिसकी जानकारी उनकी वेब साईट http://www.maharashtrahindi.org/parichay.हटमल पर दी गई है. आप के लिए उसी का अंश दिया जा रहा है. कंप्यूटर पर हिन्दी में काम करना अब बहुत आसान है। इंटरनेट पर क...

national seminar

Respected Sir, Wishing you seasons greetings and  have great pleasure to inform you that we are organizing UGC Sponsored 2-Days Interdisciplinary National Seminar on “IMPACT OF URBANIZATION ” on 24 th and 25 th January, 2011 at our College. The Inaugural Function will be held on 24 th Jan. 2011 at 10.30am at our College. We wish to invite you  in the programme. Please accept our invitation and let us know your acceptance. Looking forward to the pleasure of  having you amidst us on that day. Thanking you,

kathadesh on internet

साहित्य, संस्कृति और कला का समग्र मासिक कवि‍तायें 1.  मधुवेश: 2.  सेर्गेई एसेनिन: रूसी कविता का अमर लोकगायक : उमा         आलेख 3  हुसैन प्रसंग : प्रभु जोशी 4. सब कुछ पूछो यह मत पूछो आम आदमी कैसा है : अविनाश . उपन्‍यास वजह बेगानगी नहीं मालूम : विनोद कुमार श्रीवास्तव संस्मरण 5. अज्ञेय के तीन पत्र राजेन्द्र मिश्र के नाम कहानि‍यां 6. साक्षी : संजीव कुमार 7. नाइजीरियाई कहानी : नाम में क्या धरा है: काची ए. ओजुम्बा 8. अपने-अपने डर : नवरत्न पांडे 9. साड़ू : : हरदर्शन सहगल 10 सन् 1945 का एक रविवार :  प्रभाकर चौबे 11 तल-घर :  दीपक शर्मा 12 शहादत दिलाने वाले : सआदत हसन मंटो दलित प्रश्न 13. केरल में दलित, दलित आन्दोलन और दलित साहित्य : बजरंग बिहारी तिवारी रंगमंच 14. महाभोज की पहली प्रस्तुति :  देवेन्द्र राज अंकुर 15. लोक से सम्बन्धों की पड़ताल : हृषीकेश सुलभ प्रसंगवश व्यक्तिगत और राजन...

two days national seminar on IMPACT OF URBANIZATION

हिंदी ब्लॉग्गिंग पे राष्ट्रीय संगोष्ठी

हिंदी ब्लॉग्गिंग पे राष्ट्रीय संगोष्ठी :-                                 मित्रों यु.जी.सी. और अपने महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में मैं एक राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित करने का मन बना रहा हूँ. जिसका विषय होगा हिंदी ब्लॉग्गिंग :स्वरूप ,व्याप्ति और संभावनाएं .                    इस आयोजन के पीछे जो मुख्य बिंदु हैं ,वे हैं   * हिंदी ब्लॉग्गिंग क़ी गतिविधियों से प्राध्यापक जगत को जोड़ना . * ब्लागर्स और प्राध्यापकों का बीच सम्बन्ध स्थापित करना . * ब्लॉग्गिंग पर किताब प्रकाशित करने क़ी सम्भावना पर चर्चा करना .  * हिंदी साहित्य क़ी एक विधा के रूप में हिंदी ब्लॉग्गिंग क़ी स्थिति को देखना .  * हिंदी ब्लॉग्गिंग पर शोध कार्यों क़ी संभावनाएं तलाशना .  * अध्ययन -अध्यापन में ब्लॉग क़ी भूमिका तलाशना .                     ...

Atal Bihari Vajpayee ji ki 'Bharat' Kavita

Former Prime Minister of India - Shree Atal Bihari Vajpayeeji's poem in Hindi about 'Apna Bharat desh' at one of the functions....its just an excerpt of his fantastic poem.....just listen, how the words and the meaning create magic and had spectators spellbound...

ये दिवाली की रातें उल्लाषित किये है

जगमगाते दिए उजाले का मौसम झिलमिलाती ये रातें फुलझरियों  की सरगम गुंजन फटाकों की हँसता हुआ बचपन ये  दिवाली की रातें ये दिवाली का मौसम रंगोली के रंग है दिल का उजाला मिठाई की लज्जत खिलखिलाती हुई आशा रिश्तों की डोरे मिलने की भाषा ये दिवाली की रातें दिवाली की आशा कोई कपडे ख़रीदे कोई गहने चुने है कोई चांदी पे रुकता कोई सोना धरे है कोई गाँव को है निकला कोई दुनिया घुमे है ये दिवाली का मौसम ये दिवाली के दिन है छुरछुरी की जलना अनारो का खिलना खिलखिलाते  है बचपन बुड़ापे का हँसना आनंदित है घर जलते दिए हैं ये दिवाली की रातें उल्लाषित किये है

मुफलिसी ने जीना सिखा दिया

मुफलिसी ने जीना सिखा दिया अपनो की भीड़ में अपना बता दिया / नजर फेर बगल से निकल गया  यार था मेरा मेरी कीमत बता गया  घर में बहस थी चल रही कमरे में बैठा सुन रहा न पूंछ कुछ मुझे मेरी अहमियत बता दिया काम कोई होता सबको मेरी याद आती काम होने पे कामचोर की तोहमत लगा  दिया   मुफलिसी ने जीना सिखा दिया अपनो की भीड़ में अपना बता दिया /

India in last 25 yeras

With the advent of modern communication technologies and its rapid penetration in to ordinary Indian homes a lot of changes are taking place social , economical , and personal . It all begun with T.V serials but it was slow ,different characters of all shades and lifestyle were brought direct into homes .The serials like Mahabharata ,Ramayan  brought  religious  figures like Ram ,Krishna and great man like Bhisma and Arjun face to face with normal people which started certain increase of religious beliefs and then serial like Udan put aspiration in to a lot of home about their daughters but all this was slow and steady .with Arrival of  new  private  channels and new types of serials a drastic change begun to appear which coincided with growing use Computer ,Internet and mobile phone and suddenly their was so much change taking place so many new avenues to know so much information available on the touch of the fingers and so much connectivity tha...