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फ़रवरी, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

स्वच्छंदतावाद की संकल्पना

  1. भूमिका : स्वच्छंदतावाद की संकल्पना स्वच्छंदतावाद (Romanticism) अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में विकसित एक सशक्त साहित्यिक, कलात्मक और बौद्धिक आंदोलन था। यह आंदोलन प्रबोधन युग (Enlightenment) और नवशास्त्रवाद (Classicism) की कठोर नियमबद्धता, तर्कप्रधानता तथा कृत्रिमता के विरुद्ध एक सृजनात्मक प्रतिक्रिया के रूप में उभरा। ‘रोमांटिक’ शब्द की उत्पत्ति ‘रोमांस’ से हुई, जो मध्यकालीन वीरगाथाओं, प्रेम-कथाओं, साहसिक यात्राओं और अलौकिक घटनाओं से संबंधित था। प्रारंभ में इसका अर्थ काल्पनिक, विचित्र या असंभावित माना जाता था, परंतु कालांतर में यह शब्द प्रकृति–प्रेम, कल्पनाशीलता, व्यक्तिवाद और भावनात्मक स्वतंत्रता का पर्याय बन गया। 2. रोमांटिसिज़्म के अर्थ और परिभाषाएँ आधुनिक अंग्रेज़ी प्रयोग में रोमांटिसिज़्म के चार प्रमुख अर्थ माने गए हैं— सामान्य के विपरीत – कल्पनाशील और आदर्शवादी प्रवृत्ति अपेक्षित के विपरीत – असाधारण या स्वप्निल अनुभूति शाब्दिक के विपरीत – प्रतीकात्मक और रहस्यमय अभिव्यक्ति परंपरागत के विपरीत – उग्र, भावनापूर्ण और चित्रात्मक शैली आलोचक W. J. Long ...

भारतीय ज्ञान परम्परा और पर्यावरण चिंतन '

 🕉️ *सादर अभिवादन* 🙏 दिनांक 24 फरवरी, 2026 को हिंदी विभाग ,इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय मीरपुर, रेवाड़ी (हरियाणा)द्वारा आयोजित *एक दिवसीय*  बहुविषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी ( *हाइब्रिड मोड़* ) में सहभागिता के लिए सादर आमंत्रित किया जाता है। 👉 संगोष्ठी का मुख्य विषय :           *'भारतीय ज्ञान परम्परा और पर्यावरण चिंतन '*  👉 संगोष्ठी के विचारणीय *उपविषय* इस प्रकार होंगे– 1.​भारतीय ज्ञान परंपरा की समकालीन प्रासंगिकता 2.​वेद, उपनिषद और दर्शन : पर्यावरण चेतना 3.​पुराण, भगवद्गीता, रामायण, महाभारत : पर्यावरण चेतना 4.​बौद्ध और जैन साहित्य में पर्यावरण चेतना 5.​भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक संरक्षण 6.​भारतीय ज्ञान परंपरा का वर्तमान में पर्यावरण, शांति और सतत विकास में योगदान 7.​भारतीय ज्ञान परंपरा और भक्ति साहित्य में पर्यावरण चिंतन 8.​कथा साहित्य, हिंदी कविता, उपन्यास, नाट्य साहित्य, ​कथेतर साहित्य में पर्यावरण चिंतन 9.​भारतीय ज्ञान परंपरा: पर्यावरण, योग, वैश्विक चिंतन 10.​भारतीय ज्ञान परंपरा: प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद 11.​भारतीय ज्ञान परंपरा औ...

बुखारेस्ट में संपन्न क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलन

बुखारेस्ट में संपन्न क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलन  बुखारेस्ट, रोमानिया | 28–29 जनवरी रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट स्थित रोमानियन–अमेरिकन यूनिवर्सिटी के सभागार में 28–29 जनवरी को भारतीय दूतावास के तत्वावधान में एक क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का उद्देश्य भारत के बाहर हिंदी शिक्षण की वास्तविक चुनौतियों, भाषा-विज्ञान से जुड़ी समस्याओं तथा उनके व्यावहारिक समाधानों पर केंद्रित संवाद स्थापित करना था। इस आयोजन के मेज़बान भारतीय उच्चायोग, बुखारेस्ट के श्री सीतेश सिन्हा रहे। सम्मेलन में यूरोप, अमेरिका और भारत से हिंदी भाषा एवं साहित्य से जुड़े प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, अध्यापकों एवं शोधकर्ताओं ने सहभागिता की। सम्मेलन का उद्घाटन रोमानियन–अमेरिकन यूनिवर्सिटी के रेक्टर प्रो. कोस्टेल नेग्रिसिया ने किया। उन्होंने भारत–रोमानिया सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित करते हुए रोमानिया में हिंदी को एक सशक्त और सम्मानजनक मंच प्रदान करने का आश्वासन दिया। भारत के राजदूत महामहिम श्री मनोज कुमार महापात्र ने हिंदी शिक्षण एवं प्रशिक्षण की भावी योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए विदेश मंत्रालय का आ...