Showing posts with label गुण और मोहब्बत. Show all posts
Showing posts with label गुण और मोहब्बत. Show all posts

Sunday, 20 December 2009

आहत मन को प्यार से जीतो /

आहत मन को प्यार से जीतो ,

जजबातों को भाव से जीतो ;

कठिन समय को सब्र से जीतो ,

जीवन को तुम कर्म से जीतो /

दुविधावों को धर्म से परखो ,

रिश्तों को तुम मर्म से परखो ;

अभावों से जूझना सीखो ;

खुद पे तुम हँसना सीखो /

राहें तेरी राह तकेंगी ,

मंजिल तेरा मान करेगी ,

कठिनाई में अपनो को जीतो ,

अच्छाई में सबको पूंछों /

करुणा मत खोना तुम कभी ,

अभिमान सजोना ना तुम कभी ;

नम्रता गुण है अच्छायी का ;

झुकना आभूषण है ऊँचाई का /

अपने मन पे राज करो तुम ,

माया पे अधिकार करो तुम ;

सत से ना तुम पीछे हटना ;

ना अपना ना दूजा तू करना /

स्वच्छंदतावाद की संकल्पना

  1. भूमिका : स्वच्छंदतावाद की संकल्पना स्वच्छंदतावाद (Romanticism) अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में विकसित एक सशक्त साहित्यिक, कलात्मक और...