नूतन क्या है जो मै लायुं , क्या नूतन मै भाव सजायुं ; नित्य सुबह को नयी है किरणे , उनमे क्या मै और मिलायुं , नूतन क्या है जो मै लायुं , मेरी निजता तुममे है खोयी , तेरे सपनों से प्रभुता है जोई ; नित नए पलों का उदगम हरदम , कितने उसमे सपने मै बोयुं , नूतन क्या है जो मै लायुं , तुझको तकते आखें है सोयी ; नया है हर पल ,हर छन नया है , नयी है शामें सुबह नयी है , नया महिना साल नया है , क्या नया नया मै जोडूँ यार पुराने , क्या मै बदलूं प्यार पुराने ; नूतन क्या है जो मै लायुं , क्या नूतन मै भाव सजायुं ;
हिन्दी साहित्य, भाषा-विज्ञान, समाज-विज्ञान, भारतीय संस्कृति और सिनेमा पर प्रामाणिक शोधपरक आलेख। संपादक: डॉ. मनीष कुमार मिश्रा।