अगर जिन्दा रह्ने के पीछे
कोई सही तर्क नही है तो राम नामी बेच कर
या रंडियो की दलाली कर के
जिन्दा रह्ने मे
कोई फ़र्क नहीं है।
धुमिल- मोचीरम
स्वच्छंदतावाद : मनुष्य की मुक्ति, कल्पना और संवेदना का साहित्यिक स्वप्न डॉ. मनीष कुमार मिश्रा असोसिएट प्रोफेसर, हिन्दी विभाग के. एम. अग्रव...