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उनके साथ चलना चाहता था

उनके साथ चलना चाहता था कुछ देर तक इसीलिए ज़रूरी हर काम कुछ समेटकर , कुछ छोड़कर चल दिया । फ़िर उनसे मासूम सा सवाल किया - आप भी चल रही हैं ? वो मेरी आंखो की शोधार्थी , मुस्कुराती हुई बोली – ज़रूरी हर काम कर लिया या फ़िर मुझे देखकर बस , सब छोड़कर आ गए । बात तो सच थी । काश मैं उसके लिए ज़िंदगी भर के लिए बस उसे देखकर सबकुछ छोडकर जा पाता ।