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Sunday, 9 August 2009

अभिलाषा -५


मेरी जीवन वीणा मे ,

सारे स्वर तुझसे ही हैं ।

छेड़ूँ जिस भी तार को मैं ,

सब मे तेरा संगीत प्रिये ।

हिन्दी : पक्ष – प्रतिपक्ष

            हिं दी के पक्ष में जिस भावुकता के साथ तर्क रखे जाते हैं उन्होंने हिंदी का कोई भला नहीं किया अपितु नुकसान ही अधिक हुआ । हिंदी की ...