न खुशियों की तलाश न बदन की कोई प्यास मोहब्बत की पूरे दिल से ये जज्बा खुदा का खास मेरी आखों के पानी को न देखो मेरी बरबादिओं की रवानी को न देखो देखो इश्क का जूनून जों दौड़े है रग रग में मेरे हंसी यार की बेवफाई को न देखो गम का नहीं है गम मुझे ये मोहब्बत की तासीर हो तेरा सच तो कह देता भले ये मेरी आखिरी तारीख हो इनायत खुदा की कि प्यार का जज्बा दिया मेहरबानी तेरी तुने प्यार को रुसवा किया सच ये है कि तू है मेरी जिंदगी क़त्ल क...
हिन्दी साहित्य, भाषा-विज्ञान, समाज-विज्ञान, भारतीय संस्कृति और सिनेमा पर प्रामाणिक शोधपरक आलेख। संपादक: डॉ. मनीष कुमार मिश्रा।