छोड़ो भी कि अब, मैं ऊब सा गया हूँ
तुम्हें मनाने में ख़ुद से रूठ सा गया हूँ ।
तुम्हें मनाने में ख़ुद से रूठ सा गया हूँ ।
ऑनलाइन हिन्दी जर्नल: डिजिटल संसार में हिन्दी ज्ञान और सृजन का जीवंत मंच आज का समय सूचना की तीव्र गति, तकनीकी परिवर्तन और वैचारिक बहुलता का...