Showing posts with label तुम्हें मनाने में. Show all posts
Showing posts with label तुम्हें मनाने में. Show all posts

Tuesday, 17 June 2014

तुम्हें मनाने में

छोड़ो भी कि अब, मैं ऊब सा गया हूँ

तुम्हें मनाने में ख़ुद से रूठ सा गया हूँ ।

ह्यूम की चुनौती ने दर्शन को हमेशा के लिए कैसे बदल दिया कारणता के संकट से कांट की ज्ञान-क्रांति तक

  ह्यूम की चुनौती ने दर्शन को हमेशा के लिए कैसे बदल दिया कारणता के संकट से कांट की ज्ञान-क्रांति तक प्रस्तावना मानव-बुद्धि संसार को केवल घटन...

Popular Posts