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Monday, 4 April 2011

अभिलाषा ५०१ :-

अभिलाषा  ५०१ :-

 जब -जब चिकनी राह मिली  ,
 तब-तब मैं तो गया फिसल.
 तुझ से मिलना जब से हुआ,
 हुआ प्यार तो तभी प्रिये.

समय, स्मृति और मनुष्य की तलाश : ‘अक्टूबर उस साल’ का आलोचनात्मक पुनर्पाठ

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