स्त्री का पुरुष के प्रति प्रेम, भक्ति और आसक्ति को अनगिनत कवि यदा कदा शब्द रूप देते दिखते है किन्तु मनीष जी की कविताओं मे पुरुष की स्त्री के प्रति प्रेम और भक्ति प्रशंसनीय है मनीष जी के इस कविता संग्रह "इस बार तुम्हारे शहर मे"- में अधिकांश कविताओं में स्त्री को स्थान मिला है उन्होंने स्त्री को केवल देवी या साधारण नारी/स्त्री ना मान कर स्त्री को पुरुष की शक्ति और प्रेरणा के रूप मे प्रस्तुत किया है । "इस बार तुम्हारे शहर में " कविता संग्रह मे अधिकांश कविताओं मे स्त्री अस्था का केंद्र रही है स्त्री के हावभाव, शारीरिक गठन को सुंदर शब्दों से गरिमापूर्ण सजाया , निखारा है औरत /स्त्री होने का उन्दा अर्थ प्रकट करती कविता -"तुम जो सुलझाती हौ "- मे स्त्री की प्रकृति की तरह व्याख्या की है बदलते मौसम और उनकी विशेषताओं को अपने मे समेटे स्त्री... बांधनों से बंधी जीवन की गाँठे सुलझाती स्त्री...जिसके होने से ही सब अर्थपूर्ण है अन्यथा सबका सब व्यर्थ है पुरी कविता स्त्री की ...
हिन्दी साहित्य, भाषा-विज्ञान, समाज-विज्ञान, भारतीय संस्कृति और सिनेमा पर प्रामाणिक शोधपरक आलेख। संपादक: डॉ. मनीष कुमार मिश्रा।