
जीवन की सारी तन्हाई ,
खो कर तुझमे ही बिसराई ।
तुझसे पहले तेरे बाद ,
हर हाल मे तेरा ध्यान प्रिये ।


मेरी अन्तिम साँस की बेला ,प्रेम और संवेदना के जैविक कवि : मनीष डॉ. चमन लाल शर्मा प्रोफेसर ' हिन्दी ' शासकीय कला एवं विज्ञान स्नातकोत्तर महावि...