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जनवरी, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सुने से खाली रास्तों पे

  मेरी यादों से जब भी मिली होगी  वो अंदर  ही  अंदर  खिली  होगी .   सब  के  सवालों  के  बीच  में ,  वह  बनी  एक  पहेली  होगी .   यंहा   में   हूँ तनहा-तनहा ,  वंहा छत पे वो भी अकेली होगी .  सूने  से  खाली  रास्तों  पे , वह  अकेले ही मीलों  चली होगी .  यूँ   बाहर   से  खामोश है  मगर, उसके अंदर एक चंचल तितली होगी .  जो  जला डी गयी  बड़ी बेरहमी  से, वो बेटी भी नाजों  से पली होगी .     

तुझे चाहा मगर कह नहीं पाया यारा

तुझे चाहा मगर   कह नहीं पाया यारा   अपना हो कर भी रह गया पराया यारा     पास था यूँ तो तेरे बहुत लेकिन,  प्यासा मैं दरिया पे भी रह गया यारा . जिन्दा हूँ सब ये समझते हैं लेकिन, मुझे मरे तो जमाना हो गया यारा .     अब आवाज  भी लंगाऊं तो किसको,  मेरा अपना तो कोई ना रहा यारा.   सालों से  तेरी यादों से ही ,  मैंने खुद को ही  जलाया यारा  .

सपनो से भी जादा कुछ हो .

मैं जितना सोचता हूँ, तुम उससे जादा कुछ हो . गीत,ग़ज़ल,कविता से भी, जादा प्यारी तुम कुछ हो . प्यार,मोहब्बत और सम्मोहन,  इससे बढकर के भी कुछ हो .   रूप,घटा,शहद -चांदनी,  प्यारी इनसे जादा कुछ हो .   जितना मैंने लिख डाला,  उससे जादा ही कुछ हो .  शायद मेरी चाहत से भी,  सपनो से भी जादा कुछ हो .   

तेरी खुली जुल्फों की छाँव सी,**********

तेरी सूरत जो आँखों में बसी है, उसमे मेरी चाहत की नमी है . किसको क्या-क्या बताऊँ यारों, मेरे जीवन में उसकी ही कमी है . जन्हा था वन्ही रुक गया हूँ, तेरे बिना सफर की हिम्मत थमी  है . तेरी खुली जुल्फों की छाँव सी, इस जन्हा में कोई जन्नत नही है .  तेरे बाद बंजर की तरह ही, अब  इस जिन्दगी की जमी है .  

पाखंडी चूहा

पाखंडी  चूहा :----------------------------------- एक  चीता  सिगरेट  का  सुट्टा  लगाने  ही  वाला  था  क़ि अचानक  एक  चूहा  वहां  आया  और  बोला  “मेरे  भाई  छोड़  दो  नशा,  आओ  मेरे  साथ  भागो , देखो  ये   जंगल  कितना खुबसूरत  है,  आओ  मेरे  साथ  दुनिया  देखो''  चीते  ने  एक  लम्हा  सोचा  फिर  चूहे  के  साथ  दौड़ने   लगा . आगे  एक  हाथी  अफीम  पी  रहा  था ,   चूहा  फिर  बोला , -  देखो मेरे भाई ये नशा छोड़ दो, ये दुनिया बहुत सुंदर है . हाथी  भी  साथ  दौड़ने   लगा . आगे  शेर व्हिस्की  पीने  की तैयारी  कर  रहा  था,  चूहे  ने  उससे   भी  वही   कहा . शेर  ने  ग्लास  साइड  में  रखा     और  चूहे...

शिक्षा का व्यवसायीकरण : उचित या अनुचित

शिक्षा का व्यवसायीकरण : उचित या अनुचित                          हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि हमे वही शिक्षा लेनी चाहिए जिसके माध्यम से हम अपनी आजीविका चला  सकें. इसी बात को आज के बाजारीकरण  और भू मंडलीकरण  के युग में बढ़ावा मिला है . व्यावसायिक शिक्षा  की तरफ लोंगो का रुझान देखकर  के ही  कई  राष्ट्रिय और अंतर्राष्ट्रीय औद्योगिक घरानों ने शिक्षा  के क्षेत्र में निवेश करना शुरू किया. वैसे भी सिर्फ सरकार के भरोसे शिक्षा क्षेत्र में इतनी बड़ी पूँजी का निवेश संभव ही नहीं था . उदारवादी मापदंड  जो १९९० के बाद  अपनाए गए,उन्होंने  इस क्षेत्र में क्रांति की . निजी क्षेत्र  से पूँजी का  आना और बड़े-बड़े  अंतर्राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों का खुलना भारत के लिए बहुत ही सुखद रहा .                     इस देश में...

मजदूर मसीहा -प्रवीण बाजपयी

मजदूर मसीहा -प्रवीण बाजपयी ******  मुंबई में रहते हुए कई लोगों  से मिलने का अवसर मुझे बराबर मिलता रहा ,लेकिन जिन्दगी  में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो  आप से एक बार मिल के आप को लम्बे समय तक प्रभावित करते हैं. फिर वो आप से दूर भी हों तो भी  आप हमेशा  ऐसे लोगों को उनके विचारों  के माध्यम से  करीब पाते हैं .       श्री प्रवीण बाजपयी भी चंद उन्ही लोगों में से से हैं जिन्होंने ने मुझे बखूबी प्रभावित किया . अब तो साल में  कभी कबार ही उनसे मिलना  हो पाता है, लेकिन अपनी जरूरत पे मैं हरदम उन्हें  अपने पास पाता हूँ .एक सच्चे फ्रेंड,फिलासफर और गाइड कि तरह .       जब प्रवीन भाई कल्याण में रहते थे तो  उनका घर ही मेरा घर था , भाभी से माँ तुल्य प्रेम और स्नेह मिलता था . लेकिन कतिपय व्यक्तिगत कारणों  से प्रवीण भाई को  परेल  रहने के लिए जाना पड़ा . मैं भी अपने  शोध कार्य और  फिर नौकरी में  ऐसा उलझा कि अब फ़ोन पे ही दुआ-सलाम हो पाता  है .     लेकि...

धर्म ही नहीं ,विज्ञान सम्मत भी है वर्ण व्यवस्था -------------

 धर्म ही नहीं ,विज्ञान सम्मत  भी  है वर्ण व्यवस्था -------------                                      किसी को बुरा लगे, यह तो एक ब्लागर  होने के नाते मै नहीं चाहूँगा ,लेकिन यह एक कडवी सच्चाई है कि आज कल भारतीय हो कर भी  भारतीय सभ्यता और संस्कृति का मजाक उडाना एक फैशन सा हो गया है. जिसे वेदों के बारे में कुछ भी पता नहीं वो भी इनकी चुटकी लेने में पीछे नहीं रहता . इस से भी अजीब बात तो यह है कि हमारे देश में अमेरिका और चीन के इतिहास को पढ़ने कि तो व्यवस्था है,लेकिन अपने ही वेदों और पुरानो का ज्ञान हम नई पीढ़ी को देना जरूरी नहीं समझते. अगर कोई इस तरह कि शिक्षा लेना भी चाहे तो उसे विशेष प्रकार के गुरुकुल या वैदिक संस्थानों कि मदद लेनी पड़ती है . हम अपने ही ज्ञान को अज्ञानता वश बड़े गर्व से आज नकार रहे हैं . सचमुच यह हम सभी भारतियों के लिए शर्म कि बात है . आज अगर कोई  अपने धर्म,देश और वेदों क...

राष्ट्र के विकास में राष्ट्रभाषा हिंदी का योगदान -part 2

आज के टाइम्स ऑफ़ इंडिया में एक खबर थी कि गुजरात हाई कोर्ट ने स्वीकार किया कि देश में कोई राष्ट्र भाषा नहीं है .यह खबर आप अगर विस्तार से पढना चाहते हैं तो नीचे दिए लिंक पे क्लिक कर के पढ़ सकते हैं .  There's no national language in India: Gujarat High Court http://timesofindia.indiatimes.com/india/Theres-no-national-language-in-India-Gujarat-High-Court/articleshow/5496231.cms   वैसे मैं इस  बारे में  अपने पहले वाले पोस्ट में लिख भी चुका हूँ . राष्ट्र के विकास में राष्ट्रभाषा हिंदी का योगदान -part 1 .         अब आज फिर उसी बात को आगे बढ़ाते हुए कहना चाहता हूँ कि यह सच है कि हिंदी अभी तक हमारी राष्ट्र भाषा नहीं बन पायी है ,लेकिन इसे राष्ट्रभाषा बनाने के लिए हिंदी वालों को एक नया  आन्दोलन खड़ा करना होगा .            ऐसे में एक सवाल यह भी उठ सकता  है कि हिंदी को ही राष्ट्रभाषा का दर्जा क्यों दिया जाय ? इसके जवाब में मैं कुछ बिन्दुओं को आपके  सामने रखना चाहूँगा .इस...

राष्ट्र के विकास में राष्ट्रभाषा हिंदी का योगदान -part 1

राष्ट्र के विकास  में राष्ट्रभाषा हिंदी का योगदान                        आज  सबसे बड़ा विवाद इसी बात का है कि क्या हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा है ? आज यह प्रश्न कई लोग उठा रहे हैं . इसके  पीछे उनके  अपने  कई तरह के  स्वार्थ है. लेकिन जाने -अनजाने एक बहुत बड़ी बात फिर हमारे सामने है. इस का जवाब हमे देना ही होगा .सिर्फ गोल-गोल बातो से काम नहीं बनेगा .                       अगर बात संवैधानिक दृष्टि कि हो तो हाँ यह सही है कि -हिंदी अभी तक कानूनी और संवैधानिक दृष्टि से हिंदी इस देश की राष्ट्र भाषा नहीं बन पायी है . एक सपना जरूर हमने देखा था,संविधान के साथ. लेकिन आपसी झगड़ों में अफ़साने ,अफ़साने ही रह गए. राष्ट्रभाषा तो दूर हिंदी सही मायनों में अभी तक राजभाषा भी नहीं बन पायी है. राजभाषा के रूप में अंग्रेजी अभी तक हिंदी के समानांतर चल रही है. बल्कि व्...

गुस्सा !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

गुस्सा !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!                         आज  लगभग १५ दिन से  घर में  रंग-रोगन  का काम हो रहा  था. शाम को  कॉलेज से  वापस आते  समय मैं खुश था  कि  आज मुझे वही  धूल,अस्त-व्यस्त  सामान और  रंगों  की अजीब सी  ताज़ी महक झेलनी  नहीं पड़ेगी . घर पंहुचा तो अपना  ही घर  अपना नहीं लग रहा था . पूरा घर  एक दम  सुंदर,साफ़  और सुव्यवस्थित . मेरी किताबें भी माँ ने अच्छे से आलमारी में लगा कर रख दी थी .                         मैं यह सब देख मन ही मन खुश हो रहा था क़ि माँ ने मेरी कितनी मेहनत बचा ली . यह सब  सोचते  हुए ही एक विचार मेरे पूरे  शरीर को बिजली के करेंट की तरह ''झटका '' दे कर चला गया . मैंने अपनी किताबो  को ध्यान से देखने लगा . आशंक...

पुणे विश्व विद्यालय के पी.एचडी. गाइड की लिस्ट

 पुणे विश्व विद्यालय के पी.एचडी.  गाइड की लिस्ट  LIST OF RECOGNIZED GUIDES FROM PUNE UNIVERSITY DEPARTMENTS (Updated on 1st June 2009) This list is published as per guidelines in the Norms regarding the Recognition of Persons as Teachers of the University at different levels of various faculties. “The teacher appointed by the University in the grade of Professor or of Reader in the subject shall be deemed to have been a recognized University teacher in the said subject and related areas, for all the purposes.” Department Name of the Teacher Qualification Designation (Current) Adult & Continuing Edu.& Ext. Dr. V. B. Adhav Ph.D. Reader Adult & Continuing Edu.& Ext. Dr. D. B. Lokhande Ph.D. Reader Adult & Continuing Edu.& Ext. Dr. S. K. Shirsath Ph.D. Reader Adult & Continuing Edu.& Ext. Dr. J. S. Gaikwad Ph.D. Reader Adult & Continuing Edu.& Ext. Dr. Tej Nivalikar Ph.D. Reader Anthropology Dr. R. D....

यूं.जी.सी. के गाईड लाइन का हाल (पी.एचडी के संदर्भ में )

यूं.जी.सी. के गाईड लाइन  का हाल  (पी.एचडी के संदर्भ में                                   हाल ही में यूं.जी.सी. के गाईड लाइन के आधार पर देश के हर विश्विद्यालय में पी.एचडी के संदर्भ में  प्रवेश परीक्षा लेना अनिवार्य हो गया है ,लेकिन कई ऐसे विश्विद्यालय हैं जंहा अभी यह परीक्षा नहीं शुरू हुई. मुंबई विश्विद्यालय भी एक ऐसा ही विश्व विद्यालय है .                  पुणे में यह परीक्षा शुरू हो गई  है . मुंबई विश्विद्यालय कब जागेगा ?

जाने क्या सोचती हो,

जाने क्या  सोचती  हो, तुम जब भी चुप रहती  हो .   खामोश आंसुओं से , कितना कुछ कहती हो ,      तुम जब भी चुप रहती  हो .  

पीएच.डी प्रवेश परीक्षा शुरू

पीएच.डी  प्रवेश परीक्षा शुरू   पुणे विश्वविद्यालय  की तरफ  से  यु.जी.सी.  गाइड लाइन के  अनुसार  प्रवेश परीक्षा  शुरू  हो गई  है . इस सम्बन्ध में अधिक जानकारी पुणे विश्वविद्यालय की वेबसाईट  पे उपलब्ध है . यदि आप  इस परीक्षा में बैठना  चाहते हैं तो www.unipune.ac.in इस वेबसाईट  पे  जाकर ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं.                    Students Corner Useful Links Feedback Contact   � Admissions � Examination � Finance & Accounts � Syllabi � SET Examination   � Scholarships � Job Openings � Academic Calendar � Library � Vidyavani   � Research � Sports Section � Seminar & Conferences � Tenders � Circulars   � Colleges & Institutions ...

Welcome February 2010….!!!

Welcome February 2010….!!!

एक और २६ जनवरी ************************

एक और २६ जनवरी ************************    मित्रो ,            आज का  दिन (२६ जनवरी ) हम सभी के लिए  गर्व  और आदर का दिन है . इस महान लोकतान्त्रिक देश का यह  गणतन्त्र दिवस हमारी उम्मीदों ,संकल्पों और आशाओं  का जीवंत दस्तावेज है . यह मात्र एक ऐतिहासिक दिन नहीं ,बल्कि मानवता के इतिहास के नीव का दिन है . इतिहास साक्षी है कि हमने  कभी भी मानवता को शर्म सार  करने वाला  कोई भी कार्य नहीं  किया . जब कमजोर थे तब भी,और अब जब विश्व कि महाशक्ति  बनने जा रहे हैं तब भी .           जिस सपने को अपने आँखों में लेकर  भारत आगे बढ़ा है ,वे हैं -शांति,अहिंसा ,प्रेम ,करुना ,प्रगति ,रक्षा और वसुधैव कुटुम्बकम का महान सपना . हमे भी इन्ही सपनो को  सच करने के लिए आगे  काम करना  होगा . भारत के नव निर्माण की बुनियाद में  इन्ही मजबूत इरादों के साथ उतरना  होगा . न केवल एक  खुशहाल भारत बल्कि हमे एक खुशहाल विश्व के लिए काम करना होगा . आज वो समय आ गया है जब सारा ...

hindi sahitykaar