भ्रम है प्यार का या वेदना चाह की, नीरवता की सकल कमाई या स्वप्न मधुमास की , सहज क्षितिज की विकल रागिनी या प्रतिध्वनी स्मृति के विवश प्रवाह की , चाहत की पीड़ा या ह्रदय की क्रीडा , मंत्रमुग्ध नयन झर झर करता या अपलक आखों का स्वर कुछ कहता /
हिन्दी साहित्य, भाषा-विज्ञान, समाज-विज्ञान, भारतीय संस्कृति और सिनेमा पर प्रामाणिक शोधपरक आलेख। संपादक: डॉ. मनीष कुमार मिश्रा।