नया साल जब आता है ,याद तुम्हारी लाता है तेरी यादो की खुसबू से,यह मेरा मन महकता है । वक्त के चूल्हे के अंदर, स्मृतियों की राख़ पड़ी इसी के अंदर से वह, प्यार मेरा दहकता है । हम दोनों का मिल पाना, नामुमकिन है लेकिन तुमसे मिल पाने की , यह मुझमे आस जगाता है । भूल गई हो तुम मुझको,इसका है आभास मगर लेकिन--सायद--कुछ तो हो ,ऐसे यह भरमाता है । तेरा लौट के आ पाना ,व्यर्थ की है यह बात मगर तेरी राहों पर अक्सर ,यह मेरे नैन बिछ्वाता है । चाहा तो सब को लेकिन, सबसे पहले तुम हो तेरे बाद भी तेरी ही, यह सौगात मुझे दे जाता है । नया साल जब भी आता है ------------------------------------------------------ '' आप सभी को नव वर्ष की शुभ कामनायें ।'' मनीष कुमार मिश्रा
हिन्दी साहित्य, भाषा-विज्ञान, समाज-विज्ञान, भारतीय संस्कृति और सिनेमा पर प्रामाणिक शोधपरक आलेख। संपादक: डॉ. मनीष कुमार मिश्रा।