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तुझे इसतरह बनाते और सवारते हुवे

यूं ही तुम्हे सोचते हुवे   सोचता  हूँ क़ि चंद लकीरों से तेरा चेहरा बना दूं    फिर उस चेहरे में , खूबसूरती  के सारे रंग भर दूं .  तुझे इसतरह बनाते और सवारते हुवे, शायद  खुद को बिखरने से रोक पाऊंगा .   पर जब भी कोशिश की,  हर बार नाकाम रहा .   कोई भी रंग,  कोई भी तस्वीर,  तेरे मुकाबले में टिक ही नहीं पाते . तुझसा ,हू-ब-हू तुझ सा ,  तो बस तू है या  फिर   तेरा अक्स है जो मेरी आँखों में बसा है .   वो अक्स जिसमे   प्यार के रंग हैं   रिश्तों की रंगोली है   कुछ जागते -बुझते सपने हैं  दबी हुई सी कुछ बेचैनी है   और इन सब के साथ ,  थोड़ी हवस भी है .  इन आँखों में ही   तू है  तेरा ख़्वाब है   तेरी उम्मीद है   तेरा जिस्म है  और हैं वो ख्वाहीशें , जो  तेरे बाद   तेरी अमानत के तौर पे  मेरे पास ही रह गयी हैं . मैं जानता हूँ की मेरी ख्वाहिशें ,  अब किसी और की जिन्दगी है.   इस कार...