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Saturday, 30 January 2010

तेरी खुली जुल्फों की छाँव सी,**********

तेरी सूरत जो आँखों में बसी है,
उसमे मेरी चाहत की नमी है .
किसको क्या-क्या बताऊँ यारों,
मेरे जीवन में उसकी ही कमी है .
जन्हा था वन्ही रुक गया हूँ,
तेरे बिना सफर की हिम्मत थमी  है .
तेरी खुली जुल्फों की छाँव सी,
इस जन्हा में कोई जन्नत नही है .
 तेरे बाद बंजर की तरह ही,
अब  इस जिन्दगी की जमी है .  

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