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जब तुम्हें लिखता हूँ ।

जब तुम्हें लिखता हूँ तो मन से लिखता हूँ तुम्हारे मन में बैठकर लिखता हूँ  । जब तुम्हें लिखता हूँ तो जतन से लिखता हूँ हर शब्दों को चखकर लिखता हूँ । जब तुम्हें लिखता हूँ तो बसंत लिखता हूँ होली के रंग में तुम्हें रंगकर लिखता हूँ । जब तुम्हें लिखता हूँ तो पुरवाई लिखता हूँ तुम्हारी आस में अपनी प्यास लिखता हूँ । जब तुम्हें लिखता हूँ तो दिल खोलकर  लिखता हूँ न जाने कितने सारे बंधन तोड़कर लिखता हूँ । जब तुम्हें लिखता हूँ तो खुशी लिखता हूँ आँख की नमी को तेरी कमी लिखता हूँ ।               -------मनीष कुमार मिश्रा ।