जब तुम्हें लिखता हूँ तो मन से लिखता हूँ तुम्हारे मन में बैठकर लिखता हूँ । जब तुम्हें लिखता हूँ तो जतन से लिखता हूँ हर शब्दों को चखकर लिखता हूँ । जब तुम्हें लिखता हूँ तो बसंत लिखता हूँ होली के रंग में तुम्हें रंगकर लिखता हूँ । जब तुम्हें लिखता हूँ तो पुरवाई लिखता हूँ तुम्हारी आस में अपनी प्यास लिखता हूँ । जब तुम्हें लिखता हूँ तो दिल खोलकर लिखता हूँ न जाने कितने सारे बंधन तोड़कर लिखता हूँ । जब तुम्हें लिखता हूँ तो खुशी लिखता हूँ आँख की नमी को तेरी कमी लिखता हूँ । -------मनीष कुमार मिश्रा ।
हिन्दी साहित्य, भाषा-विज्ञान, समाज-विज्ञान, भारतीय संस्कृति और सिनेमा पर प्रामाणिक शोधपरक आलेख। संपादक: डॉ. मनीष कुमार मिश्रा।