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तुमसे झगड़ने के बाद

तुमसे झगड़ने के बाद जब भी कहता हूँ कि अब कभी मुझसे बात मत करना । अपने जेब में रखे मोबाइल को बार बार निकाल कर देख लेता हूँ कि कंही कोई काल मिस तो नहीं किया हंसी आती है सोचकर क़ि तुम्हें कितना मिस करता हूँ तुम्हें कितना प्यार करता हूँ 

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राष्ट्रीय परिसंवाद 12 - 13 दिसंबर 2014

National Seminar on "India At Present : Issues and Challenges from Pandit Jawaharlal Nehru College, Aurangabad (Maharashtra).

one day National Seminar on 16th January 2015

Sponsored by University Grants Commission, New Delhi & Swami Ramanand Teerth Marathwada University, Nanded (M.S.) About Seminar:      We are organizes the one day National Seminar on 16 th January 2015 the various aspects of A Role of Media in Agriculture & Rural Development will be discussed by the experts & scholars. Sub Themes:      The sub themes set for Seminar are… 1) Role of Media in Rural Development. 2) Panchayat Raj, Rural development     Implementation and Media 3) Importance & Responsibility of      Agriculture Newspapers 4) Rural Development & Electronic Media 5) Contribution of Media in Green     Revolution 6) Rural Journalism: Nature, Problems &       Solution 7) Modern Agriculture Journalism. 8) New trends in Agriculture Journalism. 9) Challenges of Agriculture Journalism 10) Need of Sustai...

दो दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद 16-17 जनवरी 2015

काशी : सकल-सुमंगल–रासी

                     भारत को धर्म और दर्शन की धरा के रूप में जाना और माना  जाता है । भारत अनेकता में एकता की सजीव प्रतिमा है । इसी भारतीयता का समग्र चरित्र किसी एक शहर में देखना हो तो वह होगा बनारस । बनारस को काशी और वाराणसी नामों  से भी जाना जाता है ।बनारस/वाराणसी/ काशी को जिन अन्य नामों से प्राचीन काल से संबोधित किया जाता रहा है वे हैं – अविमुक्त क्षेत्र , महाश्मशान , आनंदवन , हरिहरधाम , मुक्तिपुरी , शिवपुरी , मणिकर्णी , तीर्थराजी , तपस्थली , काशिका , काशि , अविमुक्त , अन्नपूर्णा क्षेत्र , अपुनर्भवभूमि , रुद्रावास इत्यादि । इसी का आभ्यांतर भाग वाराणसी कहलता है  । वरुणा और अस्सी नदियों के आधार पर वाराणसी नाम पड़ा ऐसा भी माना जाता है ।कहते हैं , दुनिया शेषनाग के फन पर टिकी है पर बनारस शिव के त्रिशूल पर टिका हुआ है। यानी बनारस बाकी दुनिया से अलग है।                  ...

डॉ रावेन्द्रकुमार शाहू जी की नवीनतम पुस्तक

भाई डॉ रावेन्द्रकुमार शाहू जी की नवीनतम पुस्तक प्री - बुकिंग के लिये उपलब्ध । इस पुस्तक के संपादन में उन्होंने दिन-रात अहर्निष श्रम किया है । यह पुस्तक उनके श्रम का प्रतिफल है । आदिवासी विमर्श के उत्तर समय में उनकी स्थिति-परिस्थिति को आंकनें का प्रयास इस पुस्तक के माध्यम से उन्होंने किया है ।

बनारस के बुनकरों की वर्तमान स्थिति

                 मार्क ट्वेन ( Mark Twain ) ने लिखा है कि बनारस इतिहास से भी पुराना है । इतिहास और परंपरा दोनों ही दृष्टियों से विश्व की प्राचीनतम नागरियों में से एक है काशी । अर्ध चंद्राकार रूप में गंगा किनारे बसा हुआ यह शहर महाश्मशान है तो आनंदवन भी । माँ अन्नपूर्णा और संकटमोचन हनुमान जी यहीं हैं । अक्खड़-फक्कड़-झक्कड़ स्वभाव बनारसियों को विरासत में मिला है ।  यह बाबा भोलेनाथ की नगरी है । बुद्ध की उपदेश स्थली  है । कई तीर्थंकरों की जन्मस्थली है । कबीर , रैदास और तुलसीदास इसी काशी में रहे हैं । प्रेमचंद , जयशंकर प्रसाद , भारतेन्दु , आचार्य रामचन्द्र शुक्ल , आचार्य हज़ारीप्रसाद और शिवप्रसाद सिंह जी जैसे साहित्यकार इसी काशी में रहे । इसी काशी का नाम बनारसी वस्त्र उद्योग के लिये भी सदियों से जाना गया ।                                 ...