Showing posts with label हिन्दी ग़ज़ल. Show all posts
Showing posts with label हिन्दी ग़ज़ल. Show all posts

Thursday, 16 April 2009

हर बात में -------------------

हर बात में वही बात जताते हैं
खुल के पूछो तो इठलाते हैं ।

किसी और से नही पर ,
मेरे आगे खूब इतराते हैं ।

मैने पूछा प्यार के बारे में,
वो हैं की बस बहकाते हैं ।

मन जो सुनना चाहता है,
उसी बात को सुन शर्माते हैं ।

कभी-कभी नाराज होता हूँ क्योंकि,
VO BADAY HI PYAAR SAY MANAATAY HAIN ।

स्वच्छंदतावाद : मनुष्य की मुक्ति, कल्पना और संवेदना का साहित्यिक स्वप्न डॉ. मनीष कुमार मिश्रा

  स्वच्छंदतावाद : मनुष्य की मुक्ति, कल्पना और संवेदना का साहित्यिक स्वप्न डॉ. मनीष कुमार मिश्रा असोसिएट प्रोफेसर, हिन्दी विभाग के. एम. अग्रव...

Popular Posts