1. भूमिका : स्वच्छंदतावाद की संकल्पना
स्वच्छंदतावाद (Romanticism) अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में विकसित एक सशक्त साहित्यिक, कलात्मक और बौद्धिक आंदोलन था। यह आंदोलन प्रबोधन युग (Enlightenment) और नवशास्त्रवाद (Classicism) की कठोर नियमबद्धता, तर्कप्रधानता तथा कृत्रिमता के विरुद्ध एक सृजनात्मक प्रतिक्रिया के रूप में उभरा।
‘रोमांटिक’ शब्द की उत्पत्ति ‘रोमांस’ से हुई, जो मध्यकालीन वीरगाथाओं, प्रेम-कथाओं, साहसिक यात्राओं और अलौकिक घटनाओं से संबंधित था। प्रारंभ में इसका अर्थ काल्पनिक, विचित्र या असंभावित माना जाता था, परंतु कालांतर में यह शब्द प्रकृति–प्रेम, कल्पनाशीलता, व्यक्तिवाद और भावनात्मक स्वतंत्रता का पर्याय बन गया।
2. रोमांटिसिज़्म के अर्थ और परिभाषाएँ
आधुनिक अंग्रेज़ी प्रयोग में रोमांटिसिज़्म के चार प्रमुख अर्थ माने गए हैं—
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सामान्य के विपरीत – कल्पनाशील और आदर्शवादी प्रवृत्ति
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अपेक्षित के विपरीत – असाधारण या स्वप्निल अनुभूति
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शाब्दिक के विपरीत – प्रतीकात्मक और रहस्यमय अभिव्यक्ति
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परंपरागत के विपरीत – उग्र, भावनापूर्ण और चित्रात्मक शैली
आलोचक W. J. Long के अनुसार रोमांटिक आंदोलन नियमों की दासता के विरुद्ध विद्रोह, प्रकृति की ओर पुनरागमन, मध्यकालीन रोमांस में रुचि तथा व्यक्तिगत प्रतिभा पर बल देने वाला आंदोलन था।
Lascelles Abercrombie ने इसे बाहरी अनुभव से हटकर आंतरिक अनुभव की ओर मुड़ने की प्रवृत्ति बताया।
अतः सरल शब्दों में कहा जाए तो स्वच्छंदतावाद नियमों और कृत्रिमता के विरुद्ध विद्रोह, प्रकृति और मानवीय हृदय की ओर वापसी तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उद्घोष है।
3. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उद्भव
इंग्लैंड में रोमांटिक आंदोलन का औपचारिक आरंभ 1798 में Lyrical Ballads के प्रकाशन से माना जाता है, जिसे William Wordsworth और Samuel Taylor Coleridge ने संयुक्त रूप से प्रकाशित किया। इस कृति ने अंग्रेज़ी कविता को नवशास्त्रीय बंधनों से मुक्त कर प्रकृति और सामान्य जीवन की ओर उन्मुख किया।
हालाँकि रोमांटिक प्रवृत्तियों के बीज एलिज़ाबेथीय साहित्य में पहले से विद्यमान थे। Albert Béguin ने तो यहाँ तक कहा कि “एलिज़ाबेथन हमारे पहले रोमांटिक थे।”
4. नवशास्त्रवाद के विरुद्ध विद्रोह
अठारहवीं शताब्दी का साहित्य, विशेषकर ऑगस्टन युग, तर्क, शिष्टता, संतुलन और शहरी जीवन तक सीमित था। Alexander Pope जैसे कवि बुद्धि और विवेक को प्रधानता देते थे।
फ्रांसीसी आलोचकों François de Malherbe और Nicolas Boileau-Despréaux ने सादगी, संयम और नियमबद्धता को साहित्य का आदर्श माना।
इसके विपरीत रोमांटिक कवियों ने भावना, कल्पना और आत्म-अनुभूति को केंद्र में स्थापित किया। साहित्य सामाजिक अनुकरण से हटकर व्यक्तिगत अनुभूति का माध्यम बन गया।
5. ‘प्रकृति की ओर वापसी’ (Return to Nature)
औद्योगिक क्रांति और शहरीकरण के कारण मनुष्य का जीवन यांत्रिक और कृत्रिम हो गया था। परिणामस्वरूप प्रकृति की ओर लौटने की तीव्र आकांक्षा जागी।
James Thomson की कृति The Seasons में प्रकृति पहली बार केंद्रीय विषय बनी।
आगे चलकर Thomas Gray, Robert Burns, William Cowper आदि ने प्रकृति और सामान्य जनजीवन के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
वर्ड्सवर्थ ने प्रकृति को जीवंत आत्मा के रूप में देखा—एक ऐसी सत्ता जो मनुष्य और ईश्वर से एकात्म है।
6. फ्रांसीसी और अमेरिकी क्रांति का प्रभाव
French Revolution (1789) ने ‘Liberty, Equality, Fraternity’ के आदर्शों के माध्यम से स्वतंत्रता और लोकतंत्र की चेतना को जन्म दिया।
इसी प्रकार American Revolution ने भी स्वाधीनता और मानवाधिकारों की भावना को प्रबल किया।
इन क्रांतियों ने Lord Byron, Percy Bysshe Shelley और John Keats जैसे कवियों के क्रांतिकारी आदर्शवाद को प्रेरित किया।
7. जर्मन आदर्शवाद और रहस्यवाद
जर्मन दार्शनिक विचारधारा ने मनुष्य, प्रकृति और ईश्वर के बीच एकात्म संबंध स्थापित किया। यह विचार मुख्यतः कोलरिज के माध्यम से इंग्लैंड पहुँचा।
William Blake ने रहस्यवाद और कल्पनाशीलता को काव्य में सशक्त रूप दिया। उनकी कृतियाँ Songs of Innocence और Songs of Experience रोमांटिक चेतना की आधारशिला हैं।
8. मध्यकालीन पुनरुत्थान (Medieval Revival)
रोमांटिक आंदोलन का एक महत्वपूर्ण पक्ष मध्यकालीन साहित्य का पुनरुत्थान था।
Thomas Percy की कृति Reliques of Ancient English Poetry ने लोकगाथाओं और बैलेड साहित्य में नई रुचि उत्पन्न की।
इसी प्रकार James Macpherson की Ossian तथा Thomas Chatterton की ‘Rowley Poems’ ने मध्ययुगीन चेतना को पुनर्जीवित किया।
9. रोमांटिक कविता की पीढ़ियाँ
प्रथम पीढ़ी के कवि— वर्ड्सवर्थ, कोलरिज, साउथी— ने रोमांटिक आंदोलन की आधारशिला रखी।
द्वितीय पीढ़ी— बायरन, शेली और कीट्स— को “Second Flowering of English Romanticism” कहा जाता है। इन कवियों को अपने जीवनकाल में पर्याप्त मान्यता नहीं मिली, परंतु मरणोपरांत उनकी कीर्ति विश्वव्यापी हुई।
10. स्वच्छंदतावाद की प्रमुख प्रेरणा–भूमियाँ
स्वच्छंदतावाद की प्रेरणा–भूमियाँ बहुआयामी थीं—
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प्रबोधन युग का अति-तर्कवाद
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फ्रांसीसी एवं अमेरिकी क्रांतियों से उत्पन्न लोकतांत्रिक चेतना
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औद्योगिक क्रांति से उत्पन्न यांत्रिक जीवन
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जर्मन आदर्शवादी दर्शन
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मध्यकालीन साहित्य और एलिज़ाबेथीय परंपरा का पुनरुत्थान
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व्यक्तिवाद और आत्म-अनुभूति की उभरती चेतना
11. निष्कर्ष
स्वच्छंदतावाद केवल एक साहित्यिक आंदोलन नहीं था, बल्कि यह एक व्यापक सांस्कृतिक और दार्शनिक चेतना का उभार था। इसने साहित्य को नियमबद्ध अनुकरण से मुक्त कर व्यक्तिगत अनुभूति, कल्पना और स्वतंत्रता का माध्यम बनाया।
तर्क के स्थान पर भावना, बंधन के स्थान पर स्वतंत्रता और परंपरा के स्थान पर नवीनता को प्रतिष्ठित कर स्वच्छंदतावाद ने आधुनिक साहित्य की दिशा बदल दी। यह मनुष्य की अंतःचेतना और प्रकृति–अनुराग का उत्सव है—एक ऐसा आंदोलन जिसने साहित्य को नई संवेदना और नई मानवीय दृष्टि प्रदान की।
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