Friday, 3 April 2009

यह हिन्दुस्तान है -----------------

उसका घर बारूद का मकान है
वह सचमुच कितना नादान है

जिसकी जितने उपर तक पहुँच है
उसका उतना ही बड़ा सम्मान है

इस देश की जो सरकार है
कुछ नही लगान की दूकान है

यहाँ चलने को सबकुछ चल जाता है
अजीब देश है ,यह हिन्दुस्तान है ।

No comments:

Post a Comment

Share Your Views on this..

रिश्तों की भाषा और अनुवाद की सांस्कृतिक चुनौती नीलूफ़र ख़ोदजाएवा के ‘Semantics of Kinship Terms as a Form of Address in Uzbek Translations of Premchand’ का आलोचनात्मक अध्ययन

  रिश्तों की भाषा और अनुवाद की सांस्कृतिक चुनौती नीलूफ़र ख़ोदजाएवा के ‘Semantics of Kinship Terms as a Form of Address in Uzbek Translations...

Popular Posts