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शिकायत सब से है लेकिन

जो कहनी थी , वही मैं बात , यारों भूल जाता हूँ किसी क़ी झील सी आँखों में ,   जब भी डूब जाता हूँ   नहीं मैं आसमाँ का हूँ , कोई तारा मगर सुन लो किसी के प्यार के खातिर , मैं अक्सर टूट जाता हूँ शिकायत सब से है लेकिन , किसी से कह नहीं सकता बहुत गुस्सा जो आता है , तो खुद से रूठ जाता हूँ किसी क़ी राह का कांटा , कभी मैं बन नहीं सकता इसी कारण से मफिल में , अकेला छूट जाता हूँ मासूम से सपनों क़ी मिट्टी , का घड़ा हूँ मैं , नफरत क़ी बातों से , हमेशा फूट जाता हूँ .

शिकायत सब से है लेकिन,किसी से कह नहीं सकता

जो कहनी थी ,वही मैं बात,यारों भूल जाता हूँ . किसी क़ी झील सी आँखों में, जब भी डूब जाता हूँ . नहीं मैं आसमाँ का हूँ,कोई तारा मगर सुन लो किसी के प्यार के खातिर,मैं अक्सर टूट जाता हूँ . शिकायत सब से है लेकिन,किसी से कह नहीं सकता बहुत गुस्सा जो आता है,तो खुद से रूठ जाता हूँ . किसी क़ी राह का कांटा,कभी मैं बन नहीं सकता इसी कारण से मफिल में,अकेला छूट जाता हूँ . मासूम से सपनों क़ी मिट्टी,का घड़ा हूँ मैं, नफरत क़ी बातों से,हमेशा फूट जाता हूँ .